राहुल गांधी का मेरी मर्जी वाला धरना: जंतर-मंतर से पीएम आवास तक क्यों बदला प्रदर्शन का केंद्र?
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दिल्ली में सियासी हलचल: छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष में मेरा बनाम तेरा धरना

NEET परीक्षा को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आज दिल्ली में एक नया अध्याय जुड़ गया। अब तक जंतर-मंतर पर केंद्रित रहा छात्रों का आंदोलन अचानक प्रधानमंत्री आवास के पास शिफ्ट हो गया। इस बार कमान खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संभाली। कांग्रेस ने अपनी इस नई रणनीति को इंस्टेंट धरना नाम दिया है, लेकिन इसने विपक्ष की एकजुटता पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जंतर-मंतर से 4 किलोमीटर दूर का सियासी पैंतरा

पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और अन्य दल विरोध जता रहे थे, लेकिन आज कांग्रेस ने वहां जाने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन करना उचित समझा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन के मौके पर राजाजी मार्ग स्थित उनके आवास पर एक रणनीति तैयार की गई। वहां से दिग्गज नेता मार्च करते हुए पीएम आवास पहुंचे। सवाल ये उठ रहा है कि क्या विपक्ष को अब एक साझा मंच पर भरोसा नहीं रहा? क्यों एक ही मुद्दे पर प्रदर्शन दो अलग-अलग जगहों पर हो रहे हैं?

पुलिस और कांग्रेस के बीच तीन घंटे का शक्ति प्रदर्शन

प्रधानमंत्री आवास के आसपास का इलाका अति-संवेदनशील और नो प्रोटेस्ट ज़ोन की श्रेणी में आता है। जब कांग्रेस नेताओं ने वहां धरना शुरू किया और हटने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने मोर्चा संभाला। तीन घंटे तक चले इस हंगामे में पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। अंत में, पुलिस ने राहुल गांधी सहित तमाम नेताओं को हिरासत में लिया और अलग-अलग थानों व स्टेडियम में ले गई। इस दौरान प्रदर्शन में अभद्र भाषा और तू-तड़ाक के नारों ने भी माहौल को तीखा बना दिया।

जितेंद्र सिंह का दावा: राहुल का मेरी मर्जी वाला रवैया

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा खुलासा किया है। उनके अनुसार, राहुल गांधी के साथ बातचीत के दौरान जब सरकार ने छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा की पेशकश की, तो राहुल ने इसे मान लिया था। लेकिन, कुछ ही देर बाद उन्होंने मांग बदल दी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त रख दी। जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि जब उन्हें सुरक्षा कारणों से वहां से हटने को कहा गया, तो राहुल गांधी का जवाब था— यह मेरी मर्जी है। अपनी शर्तों से बार-बार पलटने और मनमाने तरीके से धरने की जगह चुनने वाले राहुल गांधी के इस व्यवहार ने इसे छात्रों के हित से ज्यादा राजनीतिक हित की लड़ाई बना दिया है।

संसद बनाम सड़क: क्या है असली मंशा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संसद का सत्र चल रहा है, तब देश के एक जिम्मेदार विपक्षी नेता ने अपनी बात रखने के लिए संसद परिसर को क्यों नहीं चुना? राहुल गांधी ने संसद के बजाय सड़क और वह भी पीएम आवास के पास की संवेदनशील जगह को चुना। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से आम लोगों को भी वहां जुटने का आह्वान किया। यह स्पष्ट है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि विपक्ष में अपना वर्चस्व साबित करने और धरने का मालिकाना हक लेने की एक कोशिश है। क्या राहुल गांधी का यह धरना मॉडल वाकई छात्रों को न्याय दिलाएगा, या यह सिर्फ एक सियासी कुश्ती बनकर रह जाएगा?

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