संसद में दिखा राजनीतिक शिष्टाचार: सर्वदलीय बैठक के बाद सुप्रिया सुले ने छुए राजनाथ सिंह के पैर
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संसद के मॉनसून सत्र के आगाज से पहले दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक में एक भावुक और सुखद तस्वीर देखने को मिली। बैठक के बाद जब एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले बाहर निकल रही थीं, तो उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैर छुए। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी वहां मौजूद थे।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच नेताओं का यह आपसी सम्मान लोकतंत्र की गरिमा को दर्शाता है।

विपक्ष का वॉकआउट और तीखे सवाल

भले ही शिष्टाचार की तस्वीरें सामने आईं, लेकिन बैठक का माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण नहीं था। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कुछ मुद्दों पर विरोध जताते हुए वॉकआउट किया।

विपक्ष ने मुख्य रूप से नीट-यूजी पेपर लीक मामला और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बागी सांसदों की बैठने की व्यवस्था पर भी आपत्ति दर्ज कराई और सरकार से इन मुद्दों पर सदन में चर्चा की मांग की।

लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद, लेकिन संवाद जरूरी

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक को सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

रिजिजू ने कहा, लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद की भावना जीवंत बनी रहनी चाहिए। हम नियमों के दायरे में रहकर हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं ताकि यह सत्र फलदायी साबित हो।

विलय की अटकलों पर सुप्रिया सुले का स्पष्ट रुख

हाल ही में महाराष्ट्र के कुछ नेताओं की मुलाकातों के बाद एनसीपी (एसपी) के एनडीए में शामिल होने या विलय की खबरें चर्चा में थीं। इस पर सुप्रिया सुले ने विराम लगा दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्हें और न ही शरद पवार या पार्टी के किसी अन्य वरिष्ठ नेता को किसी भी दल से गठबंधन का कोई प्रस्ताव मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा, हमारी पार्टी के सभी सांसद और विधायक एकजुट हैं और हम शरद पवार के नेतृत्व में पूरी तरह संतुष्ट हैं। किसी भी नेता पर कोई दबाव नहीं है।

मानसून सत्र का एजेंडा: वंदे मातरम पर नया विधेयक

मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है। खबरों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में एक विशेष विधेयक पेश कर सकते हैं।

इस विधेयक के तहत वंदे मातरम के अपमान या इसमें बाधा डालने को कानूनी अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। सत्र के पहले ही दिन से सरकार और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं।

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