ये आजादी का दूसरा आंदोलन है : अस्पताल से सोनम वांगचुक का दहाड़ता संदेश
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पर्यावरण एक्टिविस्ट और इनोवेटर सोनम वांगचुक ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से अपना पहला बड़ा संदेश जारी किया है। 19 जुलाई की सुबह सामने आए इस संदेश में वांगचुक ने अपने संघर्ष को महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत का दूसरा आजादी आंदोलन करार दिया है।

डर और अन्याय से मुक्ति ही लक्ष्य वांगचुक ने अपनी पत्नी गीतांजलि के जरिए भेजे गए संदेश में कहा, हमें डर से मुक्त और अन्याय से मुक्त भारत चाहिए। जिस तरह NEET पेपर लीक जैसे मामले हो रहे हैं और जिस तरह मुझे अवैध हिरासत में रखा गया है, यह डर का माहौल है। यह भारत की दूसरी आजादी की लड़ाई है। उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद चलो मार्च को सफल बनाने की अपील की है।

अवैध हिरासत पर संग्राम वांगचुक ने दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें 18 जुलाई को जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराने को अवैध हिरासत बताया है। उनका आरोप है कि उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ वहां रखा गया है। वहीं, उनकी पत्नी गीतांजलि ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी अनुमति के बिना वांगचुक को कोई दवा न दी जाए। संगठन कॉकरोच जनता पार्टी ने भी दावा किया है कि वांगचुक तुरंत डिस्चार्ज होकर वापस जंतर-मंतर लौटना चाहते हैं।

पुलिस ने रद्द की संसद मार्च की अनुमति विपक्ष के दावों के बीच दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई के संसद चलो मार्च को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जंतर-मंतर पर मिली अनुमति केवल एक दिन के लिए थी, और उसके विस्तार के लिए कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है। हाई-सिक्योरिटी जोन में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल, जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तैनात कर दी गई है।

स्वास्थ्य बिगड़ा, इलाज से इनकार अनशन के 21वें दिन सोनम वांगचुक की सेहत चिंताजनक स्थिति में है। सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा के अनुसार, वांगचुक गंभीर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने ग्लूकोज, ओआरएस या आईवी फ्लूइड्स लेने से साफ इनकार कर दिया है।

डॉक्टरों ने दी चेतावनी वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एम. वली के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में कीटोएसिडोसिस की स्थिति पैदा हो सकती है, जो अंगों के लिए जहर समान है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी चिंता जताई है कि परिवार की सहमति न मिलने के कारण मेडिकल टीम इलाज शुरू नहीं कर पा रही है। वांगचुक फिलहाल डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं, जबकि दूसरी ओर उनके समर्थकों का आंदोलन जारी है।

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