लद्दाख की दुर्गम और बर्फीली पुगा वैली में भारत के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार को देश के सबसे गहरे जियोथर्मल कुओं को आधिकारिक रूप से कमीशन कर दिया है। 14,000 फीट की ऊंचाई पर 1,000 मीटर गहरे ये दो कुएं भारत के नेट-जीरो मिशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माने जा रहे हैं।
24 घंटे मिलेगी निर्बाध बिजली जियोथर्मल एनर्जी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सौर या पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं है। यह धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से उत्पन्न होती है, जो साल के 365 दिन और 24 घंटे बिजली दे सकती है। लद्दाख, जहां सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री तक गिर जाता है, वहां यह प्रोजेक्ट गेम चेंजर साबित होगा। इससे न केवल घरों को गर्म रखने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्रीनहाउस फार्मिंग के जरिए स्थानीय लोगों को कड़ाके की ठंड में भी ताजी सब्जियां मिल सकेंगी।
क्यों खास है पुगा वैली? पुगा वैली भारत का सबसे सक्रिय जियोथर्मल हॉटस्पॉट है। यहां जमीन की सतह के काफी करीब भारी मात्रा में गर्म पानी और भाप मौजूद है। इंजीनियरों ने बताया कि केवल 400 मीटर की गहराई पर ही 135 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जो बिजली उत्पादन के लिए बेहतरीन है। अभी 1 मेगावाट का यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसे भविष्य में बड़े कमर्शियल पावर प्लांट में तब्दील किया जाएगा।
चुनौतियों को मात देती इंजीनियरिंग 14,000 फीट की ऊंचाई पर ड्रिलिंग करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम के बीच भारी मशीनों को वहां तक पहुंचाना बेहद कठिन था। इन बाधाओं के बावजूद, ONGC की टीम ने रिकॉर्ड समय में काम पूरा किया। पहले कुएं की खुदाई 22 मई को और दूसरे कुएं की 8 जुलाई को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह पूरी प्रोजेक्ट टीम के लिए एक बड़ी इंजीनियरिंग जीत है।
कार्बन न्यूट्रल लद्दाख का सपना प्रोजेक्ट में पहले प्रशासनिक कारणों से देरी हुई थी, लेकिन उपराज्यपाल वीके सक्सेना के हस्तक्षेप के बाद एमओयू रिन्यू हुआ और काम ने दोबारा रफ्तार पकड़ी। यह प्रोजेक्ट लद्दाख को कार्बन-न्यूट्रल बनाने के सरकार के विजन को धरातल पर उतारने का सबसे प्रभावी जरिया है। इसके सफल होने से लद्दाख की डीजल जेनरेटरों और महंगे जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
A historic and proud moment in India’s journey towards green, renewable energy!
— LG Ladakh (@lg_ladakh) July 17, 2026
Successfully commissioned India’s first and deepest, two geothermal wells, today at Puga Valley in Ladakh. Drilled at a high altitude of over 14,000 ft, these two 1000 meter-deep wells by the ONGC… pic.twitter.com/Zqmx849zlm
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