विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान: लिफ्ट-ऑफ से पहले वो टेंशन और PM मोदी का खास फोन कॉल
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भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। श्रीहरिकोटा से स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में दस्तक दी। यह मिशन न केवल एक तकनीकी चमत्कार है, बल्कि भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की वैश्विक धाक जमाने वाली शुरुआत है।

लिफ्ट-ऑफ से पहले का तनावपूर्ण सन्नाटा

मिशन के दौरान एक समय ऐसा आया, जब कंट्रोल रूम में सन्नाटा पसर गया। काउंटडाउन के आखिरी पलों में एक इंटरनल होल्ड के कारण लॉन्च को अचानक रोकना पड़ा। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के चेहरों पर साफ तनाव था। क्या सालों की मेहनत और भारत का पहला निजी रॉकेट इतिहास रचने से चूक जाएगा? लेकिन स्काईरूट की युवा टीम ने तकनीकी चुनौती को मात दी और रॉकेट ने आसमान का सीना चीरते हुए अपनी उड़ान भरी।

काश मैं वहां होता... - PM मोदी का फोन कॉल

लॉन्च के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट के को-फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका को फोन किया। पीएम ने कहा, मैं इस मिशन पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए था। काश, मैं उस युवा टीम के साथ वहां मौजूद होता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब स्पेस सेक्टर को प्राइवेट हाथों में सौंपने का विचार आया था, तब कई लोगों को संदेह था। लेकिन 25-30 साल के इन युवाओं ने अपने इनोवेशन से उस शक की धज्जियां उड़ा दी हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत का प्राइवेट सेक्टर अब वैश्विक स्तर पर राज करने के लिए तैयार है।

सिर्फ रॉकेट नहीं, सपनों की उड़ान

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि आपने सिर्फ एक रॉकेट नहीं उड़ाया, बल्कि नई पीढ़ी के सपनों को उड़ान दी है। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि टीम का अधिकांश हिस्सा बेहद युवा है, जो भारत के यंग इनोवेशन की ताकत को दिखाता है।

अंतरिक्ष में पहुँचा वंदे मातरम्

इस मिशन की एक और खास बात रही। रॉकेट के साथ प्रधानमंत्री मोदी का हाथ से लिखा वंदे मातरम् वाला पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजा गया। इसके अलावा, इसरो के दिग्गजों और खुद स्काईरूट की टीम के संदेश भी मौजूद थे, जो इस ऐतिहासिक पल को हमेशा के लिए यादगार बना गए।

भारत के कॉमर्शियल स्पेस युग की शुरुआत

विक्रम-1 की सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट विकसित कर सकती हैं। चारों स्टेज का पहली ही कोशिश में सटीक प्रदर्शन यह साबित करता है कि भारत अब कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम के एक नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है।

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