क्या अमेरिकी सैनिकों में आई मर्दाना कमी? ट्रंप प्रशासन का नया फरमान मचा रहा हलचल
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। पेंटागन अब केवल हथियारों को आधुनिक नहीं बना रहा, बल्कि सैनिकों की शारीरिक और जैविक क्षमता को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि अब अमेरिकी सैनिकों की सालाना टेस्टोस्टेरोन टेस्टिंग अनिवार्य होगी।

क्यों लिया गया यह अनोखा फैसला? रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का मानना है कि युद्ध के मैदान में आक्रामकता (Aggression) और किलर इंस्टिंक्ट बनाए रखने के लिए शरीर में टेस्टोस्टेरोन का सही स्तर होना अनिवार्य है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को मानसिक और शारीरिक रूप से आधुनिक युद्ध प्रणालियों के कठिन हालातों के लिए तैयार करना है।

क्या होगा टेस्ट का आधार? यह टेस्टिंग 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी सैनिकों के लिए साल में एक बार अनिवार्य होगी। यदि किसी सैनिक में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया जाता है, तो उसे टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) का विकल्प दिया जाएगा। हेगसेथ का कहना है कि यह सैनिकों की बायोलॉजिकल क्षमता को बहाल करने और उन्हें युद्ध के दौरान लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की एक कवायद है।

टेस्टोस्टेरोन की कमी के खतरे आंकड़ों के अनुसार, 30 से 79 वर्ष की आयु के करीब 5.6 प्रतिशत पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी देखी जाती है। इससे न केवल मांसपेशियों में कमजोरी और थकान होती है, बल्कि डिप्रेशन, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां भी घर कर सकती हैं। यह हार्मोन पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज और हड्डियों की मजबूती के लिए जिम्मेदार होता है।

पेंटागन की नई प्राथमिकता: योद्धा बनाम सोशल एक्सपेरिमेंट रक्षा मंत्री हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि सेना का काम कोई सोशल एक्सपेरिमेंट करना नहीं, बल्कि कुशल योद्धा तैयार करना है। हाल ही में अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग ने हाइपोगोनैडिज्म (टेस्टोस्टेरोन की कमी) से पीड़ित पुरुषों के लिए रिप्लेसमेंट थेरेपी पर लगे प्रतिबंधों को भी कम किया है।

सैन्य शक्ति में ट्रंप प्रशासन का बड़ा दांव यह निर्णय सीधा संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन सैन्य शक्ति को केवल तकनीकी स्तर पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत करना चाहता है। अमेरिका का यह कदम भविष्य में सैन्य भर्ती और चिकित्सा मानकों को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है।


लेखक: कार्तिक सागर समाधिया

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