आजम खान का अवसान: भैंस ढूंढने वाली पुलिस से अब ड्रीम प्रोजेक्ट पर बुलडोजर तक का सफर
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रामपुर की राजनीति में करीब 40 साल तक बेताज बादशाह रहे समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का दौर अब ढलान पर है। 1980 में पहली बार विधायक बनने वाले आजम खान ने लंबे समय तक रामपुर की सियासत पर एकछत्र राज किया। वे 10 बार विधायक और दो बार सांसद रहे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

जब आजम की भैंसों के लिए दौड़ती थी पूरी पुलिस

आजम खान के रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि 2014 में जब उनके फार्महाउस से 7 भैंसें चोरी हुईं, तो उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। 36 घंटे के भीतर भैंसें बरामद हुईं और थाने में उनके लिए पंखे, कूलर और विशेष चारे का इंतजाम किया गया। कभी जो नेता प्रशासन को आदेश देता था, आज वही कानूनी शिकंजे में है।

कानूनी दांव-पेच और परिवार का पतन

2014 के बाद केंद्र और 2017 में यूपी में सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खान के लिए मुश्किलें शुरू हुईं। भड़काऊ भाषण और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जैसे मामलों ने उन्हें घेरा। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ मिलकर किए गए दस्तावेजों में खेल ने कानूनी सबूतों को पुख्ता कर दिया। सजा के बाद उनकी विधायकी गई और चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लग गया, जिससे उनका राजनीतिक रसूख खत्म होता चला गया।

ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर मंडराता खतरा

आजम खान का सबसे बड़ा सपना— मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी —अब उनके पतन का केंद्र बन गई है। इस यूनिवर्सिटी पर जमीन कब्जाने और सरकारी धन के दुरुपयोग के 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने अब यूनिवर्सिटी के 38 अवैध कमरों को गिराने का नोटिस जारी कर दिया है।

जनता के लिए खुली निजी सड़क

कभी जिस 4 किलोमीटर लंबी सड़क को विश्वविद्यालय परिसर के नाम पर पूरी तरह बंद कर दिया गया था, उसे अब लोक निर्माण विभाग ने सार्वजनिक रास्ता घोषित कर दिया है। 17 करोड़ से ज्यादा की लागत से बनी इस सड़क पर अब आम जनता का कब्जा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 2019 से बंद किए गए इस रास्ते को प्रशासन ने साइन बोर्ड लगाकर फिर से खोल दिया है।

राजनीति का नया रुख: विपक्ष का आरोप

इस पूरी कार्रवाई को लेकर सपा और कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। सपा प्रवक्ता फखरूल हसन ने इसे तोड़फोड़ की राजनीति बताया है, तो कांग्रेस के सचिन रावत ने इसे एजेंसियों का दुरुपयोग करार दिया है। हालांकि, बीजेपी सरकार का कहना है कि यह केवल कानून का पालन है। जेल में बंद आजम खान के अपने ही गढ़ में गिरते इस साम्राज्य को रामपुर की बदलती सियासी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है।

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