कुलदीप यादव की अनदेखी: गौतम गंभीर की नई रणनीति या टीम इंडिया की बड़ी चूक?
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इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच में अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव का प्लेइंग-11 से बाहर होना क्रिकेट गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर ने अक्षर पटेल के साथ वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता दी, जबकि कुलदीप को बेंच पर ही बैठना पड़ा।

इस फैसले ने न केवल प्रशंसकों को हैरान किया है, बल्कि पूर्व भारतीय सहायक कोच अभिषेक नायर ने भी इस पर चिंता जताई है। नायर का मानना था कि अगले साल होने वाले विश्व कप को देखते हुए कुलदीप जैसे मैच विनर को लगातार मौके मिलने चाहिए थे।

बल्लेबाजी की गहराई बनाम विकेट लेने की क्षमता गौतम गंभीर के कार्यकाल में बल्लेबाजी की गहराई (Batting Depth) टीम प्रबंधन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। इसी के चलते भारत अक्सर गेंदबाजी आक्रमण की गुणवत्ता से समझौता करता नजर आता है। पहले वनडे में भी जसप्रीत बुमराह के साथ तीन ऑलराउंडर (सुंदर, अक्षर और शिवम दुबे) उतारे गए, जिसके कारण कुलदीप जैसे आक्रामक स्पिनर को टीम से बाहर रहना पड़ा।

क्या सुंदर और अक्षर पर भरोसा जताना सही था? विशेषज्ञों का मानना है कि यह चयन चौंकाने वाला था क्योंकि टी20 सीरीज में अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर दोनों का प्रदर्शन फीका रहा था। भारत वह सीरीज 0-4 से हारा था। यहाँ तक कि आखिरी टी20 मैच में सुंदर को खराब गेंदबाजी के कारण प्लेइंग-11 से बाहर कर दिया गया था, बावजूद इसके उन्हें वनडे में मौका मिला।

पहले वनडे में सुंदर ने 4 ओवर में 13 रन भले दिए, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। हालांकि अक्षर पटेल ने 4 विकेट झटके, लेकिन मध्य ओवरों में विकेट निकालने के एक्स-फैक्टर की कमी टीम में साफ दिखी।

आंकड़ों में कुलदीप के साथ भेदभाव? 2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद से कुलदीप यादव के साथ जो हो रहा है, वह हैरान करने वाला है। इस अवधि में कुलदीप ने विदेशी सरजमीं पर भारत के लिए 10 में से केवल 6 वनडे खेले हैं। वहीं, सुंदर ने 8 और अक्षर ने 10 मैच खेले हैं। सभी प्रारूपों को मिलाकर देखें तो कुलदीप सिर्फ 11 मैच खेले हैं, जबकि सुंदर और अक्षर का आंकड़ा 26 और 30 तक पहुंच चुका है।

अभिषेक नायर की चेतावनी अभिषेक नायर का तर्क सीधा है—आप बल्लेबाजी की गहराई चाहते हैं, लेकिन विकेट लेने की कीमत पर नहीं। नायर के अनुसार, अक्षर जैसे किफायती गेंदबाज हो सकते हैं, लेकिन विपक्षी टीम को धराशायी करने के लिए कुलदीप जैसा विकेट टेकर होना अनिवार्य है। अगर भारत विकेट लेने वाले गेंदबाजों की कुर्बानी देकर केवल रन बनाने वाले ऑलराउंडरों पर निर्भर रहेगा, तो भविष्य के बड़े टूर्नामेंट्स में टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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