गंभीर को बलि का बकरा बनाना गलत , टीम इंडिया के प्रदर्शन पर एमएसके प्रसाद का बड़ा खुलासा
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भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर पर इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर मिली हार के बाद चौतरफा हमला हो रहा है। इस बीच, बीसीसीआई सिलेक्शन कमिटी के पूर्व चेयरमैन एमएसके प्रसाद ने गंभीर का बचाव करते हुए टीम के खराब प्रदर्शन की असल वजहों पर खुलकर बात की है।

गंभीर का बचाव, खिलाड़ियों की कमी पर चिंता एमएसके प्रसाद का मानना है कि हार का पूरा दोष कोच गौतम गंभीर पर डालना सरासर गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम इंडिया उस समय पूरी क्षमता के साथ मैदान पर नहीं उतरी थी। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव जैसे मैच-विनर खिलाड़ियों की अनुपस्थिति टीम के लिए बड़ा झटका थी। प्रसाद ने स्वीकार किया कि टीम तीनों ही विभागों में कमजोर नजर आई, जिसका प्रमुख कारण गलत टीम कॉम्बिनेशन रहा।

संजू सैमसन को बाहर रखना बड़ी चूक प्रसाद ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करना एक बड़ी गलती थी। वे इंग्लिश परिस्थितियों में भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं। अगर भारत की टीम चुनी जा रही है, तो संजू का नाम सबसे पहले होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि संजू को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं बैठाया जाना चाहिए था क्योंकि किसी दूसरे युवा खिलाड़ी (वैभव सूर्यवंशी) को खिलाने का दबाव था।

वैभव सूर्यवंशी को लेकर दी चेतावनी युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के टैलेंट पर मुहर लगाते हुए प्रसाद ने कहा कि वे उनके बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन उन्हें खिलाने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 15 साल के इस खिलाड़ी के साथ काम करते समय अति सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें तैयार करने का एक प्रोसेस होता है। उन्हें टीम में शामिल करने का दबाव कोच और कप्तान पर साफ दिख रहा था, जिसे टाला जाना चाहिए था।

हार्दिक पंड्या का कोई विकल्प नहीं ऑलराउंडर्स के मुद्दे पर बात करते हुए प्रसाद ने हार्दिक पंड्या को कपिल देव के बाद भारत का सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर बताया। उन्होंने कहा कि हार्दिक एक कंप्लीट क्रिकेटर हैं, जिसका कोई दूसरा विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है। उन्होंने शिवम दुबे को एक फिनिशर तो माना, लेकिन ऑलराउंडर के टैग से इनकार कर दिया। वहीं, नीतीश कुमार रेड्डी को भविष्य का सितारा बताते हुए कहा कि वे हार्दिक की भूमिका निभाने की क्षमता रखते हैं।

निष्कर्ष: गंभीर को और समय चाहिए अंत में प्रसाद ने कहा कि अभी गौतम गंभीर और उनकी कोचिंग शैली को जज करना बहुत जल्दबाजी होगी। उन्होंने जोर दिया कि असली परीक्षा तब होगी जब टीम इंडिया के सभी सीनियर खिलाड़ी उपलब्ध होंगे। फिलहाल, टीम के पास संसाधनों की कमी थी, जिसका असर सीरीज के नतीजों पर पड़ा।

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