क्या एनडीए में जाएंगे शरद पवार? राष्ट्रपति बनने के दावों और मची भगदड़ के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल
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महाराष्ट्र की राजनीति में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शरद पवार एनडीए (NDA) के करीब पहुंच रहे हैं? मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के साथ उनकी हालिया मुलाकातों ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।

2014 में एनडीए में होते तो आज राष्ट्रपति होते: अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने शरद पवार को कई बार एनडीए में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। अठावले ने कहा, शरद पवार बहुत सम्मानित नेता हैं। अगर वे 2014 में ही एनडीए का हिस्सा बन जाते, तो आज वे देश के राष्ट्रपति होते। हालांकि, अठावले ने यह भी जोड़ा कि राजनीति में हालात तेजी से बदलते हैं, इसलिए पवार के एनडीए में आने से इनकार नहीं किया जा सकता।

मुलाकातों का दौर और सियासी अटकलें

शरद पवार की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई मुलाकात को भले ही शिष्टाचार भेंट बताया गया हो, लेकिन इसका समय काफी अहम है। शिंदे ने अपनी कैबिनेट बैठक छोड़कर पवार का स्वागत किया। इसके ठीक बाद दिल्ली में मुख्यमंत्री की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकातों की चर्चाओं ने अटकलों को और तेज कर दिया है। जानकारों का मानना है कि पवार, अपने भतीजे अजीत पवार की तर्ज पर कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।

एनसीपी-एसपी में टूट का खतरा, 5 विधायक पाला बदलने को तैयार

शरद पवार की मुश्किलें सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि जमीनी भी हैं। सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) के 10 में से 5 विधायक पाला बदलने की फिराक में हैं। ये नेता विपक्ष में रहकर अपने क्षेत्र के विकास कार्यों और फंड की कमी से परेशान हैं और सत्ताधारी महायुति में शामिल होकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।

कांग्रेस का ‘गेम प्लान’ और पवार की घेराबंदी

पवार की पार्टी में मची इस भगदड़ के पीछे कांग्रेस की रणनीति को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि एनसीपी-एसपी के नेता सीधे कांग्रेस में आएं, न कि पार्टी का विलय हो। इससे कांग्रेस को अपने वरिष्ठ नेताओं के हितों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इस स्थिति से एनसीपी के बाकी विधायक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और विकल्प तलाश रहे हैं।

गद्दारों के दफ्तर वाली बयानबाजी पर भड़का गठबंधन

इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर इंडिया गठबंधन पर भी दिख रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात पर तीखी नाराजगी जताई है। राउत ने इसे गद्दारों को बढ़ावा देना करार दिया। वहीं, एनसीपी (एसपी) ने पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से विकास के मुद्दों पर बात करना एक वरिष्ठ नेता की जिम्मेदारी है, न कि कोई गद्दारी।

पीएम पद की वो कसक जो अब भी बाकी है

शरद पवार का सर्वोच्च पद से चूकना पुराना इतिहास रहा है। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद वे पीएम बनने की दौड़ में सबसे आगे थे, लेकिन पीवी नरसिम्हा राव बाजी मार ले गए। इसके बाद 1996 और 1999 के सियासी घटनाक्रमों ने भी उन्हें सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने से रोक दिया। अब जब उनकी उम्र 85 वर्ष के करीब है, तब अठावले का राष्ट्रपति वाला बयान पवार के उस पुराने राजनीतिक कद की याद दिला गया, जो कभी सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने की दहलीज तक गया था।

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