5 महीने में बदलेगी भारत की सूरत: पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर इजरायल जैसा अभेद्य सुरक्षा कवच
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भारत अपनी सीमाओं को लेकर एक ऐसे ऐतिहासिक और कड़े बदलाव की तैयारी में है, जो दुश्मन देशों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती करीब 6,000 किलोमीटर लंबी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड (Quadrangular Security Grid) का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस साल के अंत तक, भारत की सीमाएं स्मार्ट तकनीक से लैस होकर दुनिया की सबसे सुरक्षित सीमाओं में गिनी जाएंगी।

क्या है चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड?

यह सुरक्षा व्यवस्था चार स्तंभों पर टिकी होगी। इसमें केंद्र सरकार, केंद्रीय एजेंसियां, सीमा पर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और राज्य प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय नागरिक शामिल होंगे। इस ग्रिड में 7 मुख्य और 33 उप-बिंदु होंगे, जो मिलकर एक ऐसा सुरक्षा घेरा बनाएंगे जिसे भेदना नामुमकिन होगा।

इजरायल जैसी स्मार्ट तकनीक

इस सुरक्षा ग्रिड की तुलना इजरायल की सीमाओं से की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, थर्मल इमेजिंग और जमीन के नीचे घुसपैठ रोकने के लिए एंटी-टनलिंग सिस्टम शामिल होंगे। ड्रोन के जरिए होने वाली हथियारों और ड्रग्स की तस्करी पर यह तकनीक पूरी तरह लगाम लगाएगी।

आतंकी गतिविधियों पर नकेल

इस सुरक्षा योजना का दूसरा बड़ा हिस्सा एंटी-टेररिज्म ग्रिड है। इसके तहत राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इनका मुख्य फोकस साइबर क्राइम, नार्को-टेररिज्म, हथियारों की तस्करी और सीमावर्ती इलाकों में हो रहे अवैध जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic changes) को रोकना होगा।

6 महीने में होगा रिव्यू

सुरक्षा तंत्र को चाक-चौबंद रखने के लिए केंद्रीय गृह सचिव हर छह महीने में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। वहीं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख हर तीन महीने में सुरक्षा बलों और CAPF के साथ फीडबैक लेंगे। राज्य स्तर पर डीजीपी और जिला कलेक्टरों को भी लगातार निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

भारत के पास पाकिस्तान के साथ 3,233 किमी और बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किमी लंबी संवेदनशील सीमाएं हैं। गृह मंत्री अमित शाह का मानना है कि पारंपरिक सुरक्षा तरीकों से अब ड्रोन, तस्करी और घुसपैठ जैसे आधुनिक खतरों को रोकना संभव नहीं है। यह स्मार्ट ग्रिड न केवल घुसपैठियों के लिए काल साबित होगा, बल्कि सीमावर्ती जिलों में शांति और सुरक्षा की नई इबारत लिखेगा। दिसंबर 2026 से पहले इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के साथ ही भारत की सरहदें परिंदे के पर मार सकने की भी गुंजाइश नहीं छोड़ेंगी।

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