अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग मामले ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत की निगरानी में जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट में सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इनमें राम मंदिर को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। याचिकाओं में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि रिपोर्ट में SIT के गठन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी जाए।
सीलबंद लिफाफे में होगी रिपोर्ट सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि SIT की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब अगले सोमवार को निर्धारित की गई है।
सबूतों को सुरक्षित रखने की अपील याचिकाकर्ता वकील नरेंद्र गोस्वामी ने कोर्ट के सामने जोर दिया कि चढ़ावा सीधे देवता का होता है, इसलिए इसमें पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े सभी हुंडी रजिस्टर (दान रजिस्टर) और DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को तुरंत सुरक्षित किया जाए, ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।
अब तक क्या हुआ? गौरतलब है कि राम मंदिर दान में हेराफेरी के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साथ ही, विवादों के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर ने भी मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल देश की नजरें अगले सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं।
*#WATCH | Advocate Narendra Goswami, leading petitioner in the case, says, Our petition is regarding transparency because the public offerings made belong to the deity. We have stated that all Hundi registers and DVRs should be preserved. SIT should file the status report before… pic.twitter.com/Pagvnyfj30
— ANI (@ANI) July 13, 2026
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