खाड़ी में फिर भड़के बारूदी शोले : ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर खत्म, मिसाइल हमलों से दहला मध्य पूर्व
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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में लंबे समय से चल रही शांति की उम्मीदें एक बार फिर खाक हो गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस साल की शुरुआत में हुए युद्धविराम के बावजूद, खाड़ी के हालात फिर से विस्फोटक हो गए हैं। जून के अंत से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला अब एक खूंखार जंग में तब्दील हो चुका है।

बुशहर परमाणु संयंत्र तक पहुंचे हमले

हालिया सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने ईरान के 140 से अधिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स के अंदर एक इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई है। यह बिल्डिंग मुख्य रिएक्टर के बेहद करीब थी, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी हमले में केवल परमाणु केंद्र ही नहीं, बल्कि ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन साइट्स (केश्म द्वीप), ड्रोन फैसिलिटी, कोस्टल बेस और कमांड सेंटर्स को भी तबाह कर दिया गया है। अमेरिका ने ईरान के गैस एयरपोर्ट ओमिदियेह पर भी प्रहार किया है, ताकि ईरान की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी अड्डों पर बरसीं मिसाइलें

ईरान ने भी इस हमले का करारा जवाब दिया है। तेहरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों से फारस की खाड़ी में स्थित प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

जंग की जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कंट्रोल

इस महायुद्ध का मुख्य केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। दुनिया का 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को नियंत्रित करना चाहता है, जिसे अमेरिका वैश्विक व्यापार की आजादी के लिए खतरनाक मानता है। अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद ईरान में उठी बदले की आग ने इस तनाव को और अधिक कट्टर बना दिया है।

क्यों नहीं निकल पा रहा समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की सैन्य रणनीति का अंतर ही इस युद्ध को लंबा खींच रहा है। अमेरिका अपनी एयर सुपीरियरिटी और अचूक सटीक हमलों पर भरोसा करता है, जबकि ईरान एसिमेट्रिक वॉरफेयर (मिसाइल, ड्रोन और प्रॉक्सी ग्रुप्स) के जरिए छिपकर हमले करने में माहिर है।

फिलहाल, कतर में हुई बातचीत और कूटनीतिक प्रयास विफल नजर आ रहे हैं। इस संघर्ष ने न केवल खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। युद्ध के मुहाने पर खड़े इन दो देशों के बीच जारी यह अघोषित युद्ध वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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