बेंगलुरु अपने ट्रैफिक और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के लिए अक्सर चर्चा में रहता है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने शहर के एक अलग और खूबसूरत पहलू को सामने रखा है। एक शख्स ने बेंगलुरु के इंदिरानगर की तुलना पुराने यूरोपीय शहरों से करते हुए इसे विरोधाभासों का शहर बताया है।
यूरोप जैसा एहसास एक्स पर आदित्य आनंद (@biased_human) नाम के यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि इंदिरानगर, खासकर इसकी 100 फीट रोड, शहरी नियोजन का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने बताया कि शाम के समय जब सूरज की रोशनी पेड़ों के बीच से छनकर आती है, तो यह इलाका किसी पुराने यूरोपीय शहर जैसा महसूस होता है।
क्यों खास है इंदिरानगर की 100 फीट रोड? शख्स ने इसकी खूबियों को गिनाते हुए बताया कि यहां फुटपाथ चौड़े हैं, पार्किंग की उचित सुविधा है और सड़कें सुनियोजित हैं। उन्होंने लिखा, इसे देखकर लगता है कि शहर का निर्माण करते समय किसी ने वास्तव में बहुत सोच-विचार किया है। यह किसी बड़े मॉल के ग्राउंड फ्लोर जैसा अनुभव देता है, लेकिन यहां की अपनी एक अलग आत्मा है।
शांति और हरियाली का संगम पोस्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 100 फीट रोड की चहल-पहल से महज 100 मीटर दूर जाते ही माहौल बिल्कुल शांत हो जाता है। वहां घर, पेड़ और हरियाली इस तरह मौजूद है कि आप क्षण भर के लिए भूल जाते हैं कि आप देश की सिलिकॉन वैली के बीचोंबीच खड़े हैं।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया इस पोस्ट के बाद लोगों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इंदिरानगर की तारीफ से सहमत हैं, वहीं कुछ का मानना है कि शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति बिल्कुल अलग है। एक यूजर ने लिखा, बेंगलुरु के अलग-अलग इलाके रहने के बिल्कुल अलग अनुभव देते हैं।
दूसरी तरफ, कुछ लोगों ने इस तुलना पर असहमति जताई। एक यूजर ने कहा कि इंदिरानगर में भी अतिक्रमण और भीड़भाड़ की समस्याएं हैं, और हमें यूरोप की नकल करने के बजाय अपनी भारतीय संस्कृति और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए।
बहरहाल, यह चर्चा एक बार फिर से इस बात की ओर इशारा करती है कि कैसे एक ही शहर के अलग-अलग हिस्से विकास और नियोजन के मामले में एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न हो सकते हैं।
Bangalore is a paradox. Parts of this city turn into a slum the moment it rains (sorry, Bellandur). Then there is Indiranagar, which can beat an old European city on a good evening. 100 Feet Road is what happens when someone actually thinks about how a city should be built.… pic.twitter.com/aWBhGd7EBt
— Aaditya Aanand (@biased_human) July 11, 2026
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