आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है, लेकिन अब यह आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि आतंकवादियों और चरमपंथी संगठनों के लिए सबसे खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के खुलासे बताते हैं कि ISIS, बोको हराम और अलकायदा जैसे संगठन अब AI का इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने और अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।
टेक अगेंस्ट टेरेरिज्म द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से किए गए शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोधकर्ताओं ने विभिन्न AI मॉडलों से आतंकवाद से जुड़े करीब 2,300 सवाल पूछे। हैरानी की बात यह है कि 32 प्रतिशत मामलों में AI ने ऐसी जानकारी दे दी जिसे सीधे तौर पर आतंकी हमलों में इस्तेमाल किया जा सकता था। जब इन्हीं सवालों को रिसर्च के नाम पर पूछा गया, तो AI ने 42 प्रतिशत मामलों में खतरनाक जानकारी साझा की।
सिर्फ संगठन ही नहीं, व्यक्तिगत स्तर पर अपराधी भी AI का सहारा ले रहे हैं। मई 2025 में फिनलैंड के पर्कला में एक 16 साल के छात्र ने स्कूल में हमला करने के लिए ChatGPT की मदद ली थी। आरोपी ने AI से पूछा था कि हमला कैसे करें और सबसे जरूरी बात—सबूत कैसे छिपाएं। ठीक ऐसा ही मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक युवक के साथ सामने आया, जिसने AI से यह जानने की कोशिश की कि क्या पुलिस उसके डीएनए या फुटप्रिंट्स के जरिए उस तक पहुंच पाएगी।
ब्रिटेन की संसद और अन्य वैश्विक शोधों में यह बात सामने आई है कि आतंकी संगठनों के चैट लॉग में बम बनाने के तरीके और हथियारों की मरम्मत से जुड़ी बातें AI के जरिए पूछी जा रही हैं। अलकायदा से जुड़े संगठनों ने ड्रोन तकनीक को उन्नत बनाने के लिए AI का उपयोग किया है। वहीं, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि बोको हराम जैसे संगठन विस्फोटक उपकरण डिजाइन करने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ISIS और अन्य चरमपंथी गुट अब AI का उपयोग अपना नेटवर्क फैलाने के लिए कर रहे हैं। ये संगठन AI के जरिए वीडियो, पॉडकास्ट और भ्रामक सामग्री (Disinformation) तैयार कर रहे हैं। वे आपस में चंदा इकट्ठा करके AI टूल्स के प्रीमियम वर्जन खरीद रहे हैं ताकि उन्हें बिना किसी बाधा के इस्तेमाल कर सकें।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब लोन वुल्फ यानी अकेले हमला करने वाले आतंकवादियों के लिए एक डिजिटल गाइड बन गया है। वे न केवल हमलों के लिए शोध कर रहे हैं, बल्कि अपनी विचारधारा को सीमा पार फैलाने के लिए भी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। यह स्थिति सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी कर रही है, क्योंकि आतंकी अब फिजिकल ट्रेनिंग से ज्यादा डिजिटल इंटेलिजेंस पर निर्भर होते जा रहे हैं।
📄 REPORT LAUNCH | Counter-Terrorism AI Benchmark
— Tech Against Terrorism (@techvsterrorism) July 6, 2026
During the Fourth UN Counter-Terrorism Week, we convened a closed morning briefing to launch our CT AI Benchmark, the first systematic measure of how AI models respond when asked to help carry out terrorism and violent extremism.… pic.twitter.com/KUEVZAxIzu
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