क्या भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा? देश में हिंदू राष्ट्र की मांग और इस पर छिड़ी सियासी बहस के बीच योग गुरु बाबा रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने उन आशंकाओं को खारिज किया जो अक्सर अल्पसंख्यकों के मन में हिंदू राष्ट्र को लेकर उठती हैं।
किसी को डरने की जरूरत नहीं मंच से दहाड़ते हुए बाबा रामदेव ने साफ किया कि अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता भी है, तो किसी मुसलमान या ईसाई को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म और पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन इस देश में रहने वालों के पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वे सनातनी हिंदू आर्य वैदिक थे।
देवबंद का किस्सा और पूर्वजों का हवाला रामदेव ने 2009 के देवबंद दौरे का जिक्र करते हुए कहा, मैंने वहां भी यही बात कही थी कि मजहब भले अलग हों, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने पूर्वजों को नहीं मानता, वह समाज के लिए सही नहीं हो सकता।
दाढ़ी-टोपी रखें, पर चरित्र सनातनी हो मुसलमानों को सलाह देते हुए बाबा रामदेव ने आक्रामक लहजे में कहा कि लोग अपनी पसंद के कपड़े पहनें, दाढ़ी रखें या टोपी पहनें, इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने आगे कहा, दिक्कत सिर्फ इस बात से है कि आप अपनी संस्कृति और अपनी आत्मा को अपने महान पूर्वजों और ऋषि-मुनियों की परंपराओं के अनुरूप रखें।
क्या है हिंदू राष्ट्र का असली तर्क? भारत में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे संगठनों का तर्क है कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ कोई धार्मिक या थियोक्रेटिक स्टेट नहीं है। उनके अनुसार, यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। संघ का दावा है कि हिंदू कोई मजहब नहीं, बल्कि यहां रहने वाले सभी लोगों की साझा सांस्कृतिक विरासत का नाम है।
संविधान बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जंग यह पूरा मुद्दा अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता के बीच की लड़ाई बन चुका है। जहां समर्थक इसे देश की सांस्कृतिक जड़ों की वापसी मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि भारत का संविधान किसी एक धर्म को प्राथमिकता नहीं देता। आलोचकों का मानना है कि ऐसी अवधारणाएं अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा आज भी देश की राजनीति में सबसे संवेदनशील और गर्म विषयों में से एक बना हुआ है।
#WATCH | Delhi: Yog Guru Baba Ramdev says, There is a Deoband near our Haridwar. I was invited there in 2009, and I told them, our religions may differ, but our ancestors are the same. There is no need for anyone to fear the concept of a Hindu Rashtra . The ancestors of us all… pic.twitter.com/1VwZjPfZvw
— ANI (@ANI) July 12, 2026
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