अब एयरपोर्ट जैसी दिखेगी लखनऊ की शान: 400 करोड़ से बदल रही चारबाग रेलवे स्टेशन की सूरत
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लखनऊ का ऐतिहासिक चारबाग रेलवे स्टेशन अब पूरी तरह से बदलने वाला है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इसे वर्ल्ड-क्लास ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। 400 करोड़ रुपये के मेगा बजट से स्टेशन पर यात्रियों को हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

विरासत से छेड़छाड़ नहीं, पीछे बनेगा नया स्मार्ट भवन चारबाग स्टेशन अपनी ब्रिटिश कालीन और अवधी वास्तुकला के लिए मशहूर है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पुरानी ऐतिहासिक इमारत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। भव्यता को बनाए रखने के लिए स्टेशन के पिछले हिस्से में 7-मंजिला अत्याधुनिक स्मार्ट भवन का निर्माण किया जा रहा है।

एयरपोर्ट जैसा एयर कॉनकोर्स स्टेशन पर 115 मीटर लंबा और 120 मीटर चौड़ा एयर कॉनकोर्स बनाया जा रहा है, जो प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 7 के ऊपर से गुजरेगा। यात्रियों को अब प्लेटफॉर्म पर भीड़ में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। वे कॉनकोर्स में एसी लाउंज और फूड कोर्ट का आनंद ले सकेंगे और एस्केलेटर के जरिए सीधे अपनी ट्रेन तक पहुंच पाएंगे।

बढ़ेंगे प्लेटफॉर्म, कंट्रोल होगी भीड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्म की संख्या 9 से बढ़ाकर 11 की जा रही है। इससे स्टेशन की ट्रेन संचालन क्षमता 300 तक पहुंच जाएगी। स्टेशन के हर प्लेटफॉर्म पर नई लिफ्ट, एस्केलेटर और चौड़े फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं ताकि बुजुर्गों और दिव्यांगों को कोई परेशानी न हो।

मल्टी-लेवल पार्किंग और बेहतर कनेक्टिविटी वाहन प्रबंधन के लिए एक आधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग बनाई जा रही है, जिसमें 900 कारें और 900 बाइक खड़ी करने की जगह होगी। स्टेशन पहले से ही मेट्रो और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से जुड़ा है, जिससे यात्रियों का सफर और अधिक सुगम हो जाएगा।

कब तक पूरी होगी यह परियोजना? रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को 2026 के अंत से जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। निर्माण कार्य इस तरह से किया जा रहा है कि यात्रियों की आवाजाही पर इसका असर न पड़े। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद लखनऊ के विकास की नई पहचान बनेगा।

ऐतिहासिक महत्व: जहां गांधी-नेहरू पहली बार मिले बता दें कि चारबाग स्टेशन का डिजाइन जेएच हॉर्नीमैन ने तैयार किया था, जो राजस्थानी, मुगल और अवधी कला का अनूठा मेल है। यह वही स्टेशन है जहां 26 दिसंबर 1916 को महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। अब यही स्टेशन आधुनिक भारत की नई भव्यता की गवाही देगा।

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