अब आगरा से ग्वालियर का सफर सिर्फ 80 मिनट में: तीन राज्यों को जोड़ेगा नया सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे
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आगरा और ग्वालियर के बीच की दूरी अब इतिहास बनने वाली है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) 88 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है। यह एक्सप्रेसवे न केवल समय की भारी बचत करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी की एक नई तस्वीर पेश करेगा।

तेज रफ्तार का नया सफर

वर्तमान में आगरा से ग्वालियर जाने के लिए धौलपुर और मुरैना के भारी ट्रैफिक और संकरी सड़कों से गुजरना पड़ता है, जिसमें करीब 2.5 से 3 घंटे का समय लगता है। नए 6-लेन (भविष्य में 8-लेन) एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति 100-120 किमी प्रति घंटा होगी। इससे यात्री महज 75 से 80 मिनट में अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे।

दिल्ली-NCR से सीधी कनेक्टिविटी

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी दिल्ली से इसका सीधा जुड़ाव है। यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा इनर रिंग रोड के जरिए अब दिल्ली से ग्वालियर की दूरी महज 4 घंटे में सिमट जाएगी, जो अभी 6-7 घंटे का सफर है। साथ ही, मुरैना के पास इसे प्रस्तावित चंबल एक्सप्रेसवे (अटल प्रगति पथ) से जोड़ा जाएगा, जो आगे चलकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ग्रिड को भी कनेक्ट करेगा।

भौगोलिक चुनौतियों का इंजीनियरिंग समाधान

यह एक्सप्रेसवे चंबल के बीहड़ों से होकर गुजरेगा, जिसके लिए इंजीनियरिंग का खास ध्यान रखा गया है। प्रोजेक्ट में 8 बड़े और 23 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और एक रेलवे ओवरब्रिज शामिल है। चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष ग्रीन बेल्ट और अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे।

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति

इस 4,613 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 93% से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। आगरा, धौलपुर, मुरैना और ग्वालियर के कुल 63 गांवों को इस रूट में शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, किसानों के साथ मुआवजे के कुछ छोटे विवादों को सुलझाया जा रहा है और 2027-2028 तक इसके निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

आर्थिक और पर्यटन के लिए गेमचेंजर

यह एक्सप्रेसवे ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए आर्थिक समृद्धि का द्वार खोलेगा। औद्योगिक क्षेत्रों के दिल्ली-एनसीआर बाजार से जुड़ने से माल ढुलाई आसान होगी और लागत भी कम होगी। इसके अलावा, आगरा के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और एमपी-राजस्थान के पर्यटक केंद्रों के बीच आवाजाही बढ़ने से पर्यटन उद्योग को भी नई रफ्तार मिलेगी।

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