भारत में मंदिर केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद समृद्ध हैं। हर साल करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में भारी मात्रा में नकद, सोना-चांदी और कीमती वस्तुएं दान करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह धन सुरक्षित कैसे रहता है और इसका हिसाब कौन रखता है?
देश के सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी मंदिर देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में से एक है, जहाँ सालाना चढ़ावा 1,700 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, अयोध्या के राम मंदिर को भी बहुत कम समय में 582 करोड़ रुपये से ज्यादा की भेंट प्राप्त हुई है। मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर और बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसी तीर्थ स्थल भी सालाना करोड़ों रुपये का दान अर्जित करते हैं, जो श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ निरंतर बढ़ रहा है।
दान के आधुनिक और पारंपरिक तरीके मंदिरों में दान स्वीकारने के दो मुख्य तरीके हैं। पहला पारंपरिक तरीका हुंडी या दान पेटियां हैं, जो दशकों से चलन में हैं। दूसरा आधुनिक तरीका ई-डोनेशन है। अब भक्त यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट्स के जरिए दान कर सकते हैं। इसके अलावा, विशिष्ट पूजा और प्रसाद के लिए भी डिजिटल भुगतान की सुविधा दी गई है।
किसके हाथों में होती है पूरी जवाबदेही? मंदिरों का प्रबंधन सामान्यतः ट्रस्ट, देवस्थानम बोर्ड या श्राइन बोर्ड द्वारा किया जाता है। दान पेटियों को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में, अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाता है। नकदी को सीधे बैंकों में जमा कर दिया जाता है, जबकि सोने-चांदी के आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई बड़े मंदिर स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियों से सालाना जांच भी करवाते हैं।
कहां खर्च होता है करोड़ों का चढ़ावा? इस धन का मुख्य हिस्सा मंदिर के दैनिक संचालन, पूजा-अर्चना और कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। इसके साथ ही, बड़े संस्थान इस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त भोजन, धर्मशालाएं और आपदा राहत जैसे सामाजिक कार्यों के लिए भी करते हैं।
चुनौतियां और सुरक्षा का सवाल बड़ी धनराशि होने के कारण कई बार मंदिर विवादों में भी घिरे हैं। सबरीमाला और श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर जैसे स्थानों पर सोने और कीमती रत्नों की हेराफेरी के मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर हुई कथित अनियमितताओं ने भी प्रबंधन और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद एसआईटी (SIT) मामले की जांच कर रही है।
सुरक्षा का क्या है भविष्य? मंदिरों में चोरी और अनियमितताओं को रोकने के लिए अब सीसीटीवी सर्विलांस, डिजिटल डेटाबेस और बैंकिंग ऑडिट को अनिवार्य बनाया जा रहा है। हालांकि, देश के सभी मंदिरों में सुरक्षा की कोई एकसमान प्रणाली अभी तक नहीं है, जिसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में मंदिरों को और भी सख्त और पारदर्शी डिजिटल निगरानी की जरूरत है।
*STORY | Ram temple donation theft a disgrace; we feel humiliated: Nripendra Mishra
— Press Trust of India (@PTI_News) July 11, 2026
Ram Temple Construction Committee Chairman Nripendra Mishra on Saturday said the alleged donation theft at the Ayodhya temple was a disgraceful blot (kalank), and everyone felt utterly… pic.twitter.com/87k0ndfICu
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