अफ्रीका का वो छोटा सा देश, जो LGBTQ+ लोगों के लिए बना जन्नत
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अफ्रीका महाद्वीप का नाम सुनते ही अक्सर समलैंगिकता के खिलाफ कड़े कानूनों और दंड की तस्वीरें सामने आती हैं। कई देशों में तो इसके लिए उम्रकैद या मौत तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन, समुद्र के बीच बसा एक छोटा सा द्वीपीय देश केप वर्डे (Cape Verde) इस पूरी धारणा को बदल रहा है।

अफ्रीका में उम्मीद की किरण जहां अफ्रीका के 30 से अधिक देशों में समलैंगिकता एक गंभीर अपराध है, वहीं केप वर्डे ने साल 2004 में ही इसे कानूनी मान्यता दे दी थी। 2008 में बने एक खास कानून के तहत workplace पर किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी पसंद या पहचान को लेकर भेदभाव करना दंडनीय अपराध बना दिया गया। आज यह देश पूरे महाद्वीप में LGBTQ+ समुदाय के लिए सबसे सुरक्षित और उदार जगह माना जाता है।

खुलेआम जीते हैं लोग, नहीं है कोई डर केप वर्डे में लोग अपनी पहचान को छुपाते नहीं हैं, बल्कि गर्व से जीते हैं। 29 साल के मेकअप आर्टिस्ट लियो इसका बड़ा उदाहरण हैं। वे कहते हैं, मुझे पता है कि अफ्रीका के अन्य हिस्सों में हमारे जैसे लोगों की क्या स्थिति है, लेकिन केप वर्डे में रहकर मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। वहीं, 37 साल के टीचर वाल्टर खुलेआम समलैंगिक हैं और स्कूलों में बच्चों के साथ इस विषय पर खुलकर बात करते हैं, जहां उन्हें भरपूर सम्मान मिलता है।

सरकार का सख्त रुख केप वर्डे सरकार का मानना है कि प्यार किसी की भी निजी आज़ादी है। परिवार और सामाजिक समावेशन मंत्री फर्नांडो एलिसियो फरेरे कहते हैं, हमारा देश खुले विचारों वाला है। कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है और सरकार किसी की निजी स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं करेगी।

चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुईं सब कुछ इतना आसान भी नहीं है। हालांकि कानून बहुत मजबूत हैं, लेकिन सामाजिक मानसिकता बदलने में अभी समय लगेगा। सिंडजी जैसी ट्रांसवुमन को अभी भी कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है, और जेनेट जैसी महिलाओं को आज भी सड़कों पर तानों का शिकार होना पड़ता है।

निष्कर्ष यह है कि केप वर्डे ने पूरे अफ्रीका के लिए एक मिसाल पेश की है। बदलाव की शुरुआत हो चुकी है, और जेनेट के शब्दों में कहें तो, आजादी तो है, अब समाज की सोच को पूरी तरह बदलने की जरूरत है।

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