पागल साब की अनोखी मिसाल: 80 साल के इस आयरिश शख्स ने बचाई जोधपुर की लुप्त होती विरासत
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जोधपुर: भारत की प्राचीन कला और विरासत को संजोने के मामले में अक्सर हम खुद को पीछे पाते हैं, लेकिन एक 80 वर्षीय आयरिश नागरिक कैरन रॉन्सले ने वो कर दिखाया है जिसे देख पूरी दुनिया दंग है। जोधपुर की उपेक्षित बावड़ियों को जीवनदान देने वाले रॉन्सले को स्थानीय लोग प्यार से पागल साब कहते हैं। हाल ही में बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने भी उनके इस जज्बे को सलाम किया है।

कौन हैं पागल साब ? कैरन रॉन्सले साल 2014 में एक पर्यटक के तौर पर जोधपुर आए थे। यहाँ की ऐतिहासिक बावड़ियों और झालरों (सीढ़ीदार तालाबों) की बदहाली देखकर उनका मन भर आया। जो कचरे से भरी और धूल फांक रही संरचनाएं थीं, उन्हें रॉन्सले ने अपनी आंखों से सफाई अभियान शुरू कर पुनर्जीवित करना शुरू किया। उनकी इसी जूनूनी मेहनत के कारण उन्हें यह उपनाम मिला।

आनंद महिंद्रा ने की तारीफ आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर रॉन्सले का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, 80 साल के कैरन रॉन्सले को उनके जुनून के लिए पागल साब कहा गया। सौभाग्य से, आज भारत की बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए आपको पागल या फिरंगी होने की जरूरत नहीं है। महिंद्रा ने इस बात पर जोर दिया कि विरासत को बचाने के लिए किसी विशेष स्थान का निवासी होना जरूरी नहीं, बल्कि अटूट समर्पण ही काफी है।

बावड़ियाँ: सिर्फ पत्थर नहीं, जीवन का आधार राजस्थान जैसे पानी की कमी वाले प्रदेश में ये बावड़ियाँ सदियों से जीवन रेखा रही हैं। ये न केवल जल संचयन का जरिया थीं, बल्कि सामुदायिक मिलन का मुख्य केंद्र भी थीं। समय के साथ आधुनिकता की दौड़ में इनकी उपेक्षा हुई और ये डंपिंग ग्राउंड बन गईं। रॉन्सले ने इसी गौरव को वापस लाने की बीड़ा उठाया है। उन्होंने रामबौरी और गुलाब सागर जैसी कई ऐतिहासिक जगहों की सफाई कर उन्हें नई पहचान दी है।

सोशल मीडिया पर उमड़ा सम्मान आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी रॉन्सले के मुरीद हो गए हैं। लोगों का कहना है कि विरासत के संरक्षण के लिए राष्ट्रीयता मायने नहीं रखती, बल्कि जुड़ाव और परवाह मायने रखती है। एक यूजर ने लिखा, अजीब बात है कि सबसे समझदारी भरा काम करने वाले को लोग पागल कहते हैं।

कैरन रॉन्सले जैसे लोग आज उन सभी के लिए मिसाल हैं जो अपनी जड़ों और इतिहास को भूलते जा रहे हैं। उनका यह निस्वार्थ अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखने का एक बड़ा संदेश है।

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