कैरेबियाई देश क्यूबा एक बार फिर पूरी तरह से अंधेरे में डूब गया है। शुक्रवार को देश में महज एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी ब्लैकआउट हुआ, जिससे पूरे द्वीप की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। सरकारी बिजली कंपनी यूनियन इलेक्ट्रिक डी क्यूबा के अनुसार, यह संकट स्थानीय समयानुसार शाम 4:30 बजे शुरू हुआ। यह इस साल का चौथा बड़ा ब्लैकआउट है, जो देश की जर्जर अर्थव्यवस्था और चरमराते बुनियादी ढांचे की पोल खोलने के लिए काफी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा का बिजली संकट तकनीकी से ज्यादा राजनीतिक है। इसके केंद्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाई गई वास्तविक तेल नाकाबंदी है। जनवरी में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से ही ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा को होने वाली विदेशी तेल की आपूर्ति को लगभग पूरी तरह काट दिया है।
इस संकट की शुरुआत 3 जनवरी को हुई, जब ट्रंप ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी। मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाए जाने के बाद, ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेजुएला अब क्यूबा को न तो तेल भेजेगा और न ही वित्तीय मदद देगा। 29 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश के जरिए अमेरिका ने क्यूबा को असामान्य खतरा घोषित कर दिया और ईंधन भेजने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दे दी।
तेल की कमी का सीधा असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी है कि ईंधन के अभाव में परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, क्यूबा में शिशु मृत्यु दर पिछले कुछ महीनों में लगभग दोगुनी हो गई है। डॉक्टरों के पास दवाओं और जरूरी उपकरणों का भारी अभाव है, जिससे स्थितियां भयावह होती जा रही हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। रुबियो का कहना है कि अमेरिका ने कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है और क्यूबा के इस ऊर्जा पतन के लिए वहां की सरकार का कुप्रबंधन और अकर्मण्यता ही एकमात्र कारण है।
इस गंभीर संकट से उबरने के लिए क्यूबा अब जीवाश्म ईंधन से हटकर सौर और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख कर रहा है। इसमें अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी चीन, क्यूबा को सौर तकनीक मुहैया कराकर मदद कर रहा है। फिलहाल क्यूबा की कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा मात्र 18 प्रतिशत है। सरकार ने 2030 तक इसे 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए यह लक्ष्य एक दूर का सपना सा लग रहा है।
🇨🇺 Cuba se hunde en la oscuridad
— Manuel Lopez San Martin (@MLopezSanMartin) July 11, 2026
La isla sufrió su segundo apagón nacional en una semana
Millones de personas enfrentan una crisis energética cada vez más profunda, reflejo del colapso que vive la dictadura cubana
📹 @NewsArenaIndia pic.twitter.com/O3G4UuJxjW
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