पीएम मोदी की ग्लोबल कूटनीति: 12 साल में 100 से ज्यादा विदेश यात्राएं, जापान है टॉप पर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में न्यूजीलैंड के दौरे पर हैं। यह उनकी तीन देशों की यात्रा का अंतिम चरण है, जिसमें वे ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया भी गए थे। पीएम मोदी की विदेश यात्राएं हमेशा सुर्खियों में रहती हैं, जिनके पीछे निवेश, व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे गहरे उद्देश्य होते हैं।

12 वर्षों में 1 साल विदेश में साल 2014 से 2026 के बीच पीएम मोदी 70 से अधिक देशों की 100 से ज्यादा यात्राएं कर चुके हैं। इन दौरों में उन्होंने 370 से अधिक दिन विदेशों में बिताए हैं, यानी पिछले 12 वर्षों में उनका लगभग एक साल विदेश यात्राओं में बीता है। सबसे अधिक सक्रियता 2015 में देखी गई, जब उन्होंने 57 दिनों में 12 देशों का दौरा किया। वहीं, 2020 में महामारी के चलते सभी अंतरराष्ट्रीय दौरे ठप रहे थे।

जापान पर रहा विशेष ध्यान आंकड़ों के मुताबिक, पीएम मोदी ने सबसे अधिक 8 बार जापान की यात्रा की है। बुलेट ट्रेन परियोजना, रक्षा सहयोग और क्वाड इंडो-पैसिफिक रणनीति इसके मुख्य कारण रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका (7), फ्रांस (6), यूएई (6), रूस (5), चीन (5), नेपाल (5) और जर्मनी (5) का दौरा भी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

कूटनीति के पीछे के मुख्य उद्देश्य पीएम की यात्राएं महज औपचारिकता नहीं होतीं। इनका लक्ष्य द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और जी-20, ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखना होता है। इन बैठकों से अक्सर रक्षा सौदे और तकनीकी सहयोग के बड़े समझौते निकलकर आते हैं।

पड़ोसी देशों को प्राथमिकता पीएम मोदी ने नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों पर हमेशा विशेष ध्यान दिया है। 2014 में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए उन्होंने भूटान को चुना था, जो दोनों देशों के बीच के अनूठे संबंधों की मिसाल है।

इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक करार जुलाई 2026 का दौरा बेहद सफल रहा। इंडोनेशिया में उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ ₹5,500 करोड़ का रक्षा समझौता किया, जिसके तहत भारत ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्यात करेगा। साथ ही, उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान बिन्तांग आदिपूर्णा से नवाजा गया।

ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने हैट्रिक के साथ तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसमें यूरेनियम निर्यात और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को स्पष्ट करते हैं।

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