टीएमसी को बड़ा झटका: दीदी का साथ छोड़ बीजेपी में शामिल हुए सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय
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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के तीन बड़े नेताओं—सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाइक—ने गुरुवार (9 जुलाई) को कोलकाता स्थित बीजेपी कार्यालय में आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।

बीजेपी में भव्य स्वागत पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में इन तीनों नेताओं को पार्टी का झंडा सौंपा गया। भट्टाचार्य ने कहा कि इन नेताओं का दशकों पुराना राजनीतिक अनुभव आने वाले समय में राज्य में बीजेपी को और अधिक सशक्त बनाने में मदद करेगा।

सुखेंदु शेखर रॉय का गंभीर आरोप बीजेपी में शामिल होते ही सुखेंदु शेखर रॉय ने टीएमसी पर तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि आरजी कर मामले में जब उन्होंने संसद में आवाज उठाई थी, तब उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं और उन्हें बार-बार लाल बाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) तलब किया गया। रॉय ने कहा, देश में 800 सांसद हैं, लेकिन किसी ने मेरी तरह आवाज नहीं उठाई। टीएमसी में अब केवल भ्रष्टाचार और तानाशाही बची है, इसीलिए मैंने बीजेपी का रास्ता चुना।

सुष्मिता देव ने किचन कैबिनेट पर साधा निशाना पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने टीएमसी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, बीजेपी मेरिट के आधार पर काम करने वाली पार्टी है। इसके विपरीत, टीएमसी और इंडिया गठबंधन में सब कुछ किचन कैबिनेट और गुटबाजी का खेल है। सुष्मिता ने स्पष्ट किया कि दो नावों पर सवार रहना अब मुमकिन नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को देखते हुए यह फैसला लिया।

टीएमसी के लिए खतरे की घंटी यह दलबदल ऐसे समय में हुआ है जब ममता बनर्जी की पार्टी विधानसभा चुनावों के बाद आंतरिक कलह और भारी असंतोष से जूझ रही है। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद प्रकाश चिक बड़ाइक के इस्तीफे ने भी पार्टी की संगठनात्मक नींव को हिलाकर रख दिया है। बारिक ने अपने इस्तीफे में पार्टी से मोहभंग होने के स्पष्ट संकेत दिए थे।

क्या आगे और भी बगावत होगी? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीन बड़े चेहरों का बीजेपी में जाना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा संकेत है। जिस तरह से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं, उससे यह साफ है कि सत्ता के गलियारों में टीएमसी का प्रभाव कम हो रहा है। बीजेपी का दावा है कि ये तो केवल शुरुआत है, आने वाले दिनों में और भी कई नेता दीदी का साथ छोड़ सकते हैं।

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