ममता बनर्जी को बड़ा झटका: TMC के तीन दिग्गज सांसदों ने थामा बीजेपी का दामन
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों—सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाइक और सुखेंदु शेखर राय—ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रुख कर लिया है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।

बीजेपी की बढ़ती ताकत बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर बढ़ते भरोसे का प्रतीक बताया है। भट्टाचार्य ने दावा किया कि इन वरिष्ठ नेताओं का आना बंगाल में बीजेपी के बढ़ते जनाधार का स्पष्ट संकेत है।

कौन हैं सुष्मिता देव? राजनीति में एक चर्चित चेहरा रहीं सुष्मिता देव ने कांग्रेस से अपने सफर की शुरुआत की थी। वे महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। 2021 में टीएमसी में शामिल हुईं सुष्मिता ने अब बीजेपी के साथ अपना नया सफर शुरू किया है। उन्होंने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी को मौका मिला, तो यहां भी असम और त्रिपुरा की तरह विकास की नई लहर आएगी।

आरजी कर कांड पर सुखेंदु शेखर राय के गंभीर आरोप अनुभवी नेता सुखेंदु शेखर राय का बीजेपी में शामिल होना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज घटना के बाद सच बोलने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। सुखेंदु ने कहा कि उन्होंने पुलिस कमिश्नर के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बदले में पुलिस ने उन्हें लगातार समन और परिवार को धमकियां दीं। उन्होंने कहा कि बंगाल में डर का माहौल है, जिसके कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।

प्रकाश चिक बड़ाइक का दबदबा प्रकाश चिक बड़ाइक, जो टीएमसी से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए थे, अब बीजेपी के पाले में हैं। उनका पार्टी छोड़ना संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपना रुख अभी स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन उनके जाने से टीएमसी का आदिवासी और उत्तरी बंगाल में आधार कमजोर होने की संभावना है।

क्या बदलेगा बंगाल का सत्ता समीकरण? मानसून सत्र से ठीक पहले इन सांसदों का इस्तीफा यह दर्शाता है कि टीएमसी के भीतर गहरी दरारें हैं। सुष्मिता देव ने पार्टी के शुद्धिकरण पर उठ रहे सवालों को लेकर टीएमसी की आंतरिक कलह पर मुहर लगा दी है। अब देखना यह होगा कि क्या इन दिग्गजों का प्रभाव आगामी चुनावों में ममता बनर्जी की सत्ता को सीधे चुनौती दे पाएगा या नहीं।

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