इंडोनेशिया: जहां मुस्लिम कलाकार निभाते हैं राम-सीता का किरदार, हनुमान हैं सेना के प्रेरणास्रोत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया दौरा न केवल कूटनीतिक रूप से अहम रहा, बल्कि इसने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की डोर को और मजबूत कर दिया है। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद, इंडोनेशिया की रगों में भारतीय संस्कृति और रामायण आज भी जीवित है।

दो हजार साल पुराना सांस्कृतिक संबंध

भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंध करीब दो हजार साल पुराने हैं। पहली सहस्राब्दी में भारतीय व्यापारी और विद्वान समुद्री मार्गों से इंडोनेशिया पहुंचे, जिससे वहां हिंदू-बौद्ध संस्कृति का प्रसार हुआ। जावा, बाली और सुमात्रा जैसे क्षेत्रों में प्राचीन हिंदू राजाओं ने संस्कृत साहित्य, रामायण और महाभारत को वहां की जीवनशैली का अभिन्न अंग बना दिया।

रामायण: धर्म नहीं, सांस्कृतिक विरासत

इंडोनेशिया में इस्लाम के विस्तार के बाद भी रामायण और महाभारत को वहां के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सहेज कर रखा है। प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर में पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से रामायण का मंचन होता है।

अचरज की बात यह है कि इन मंचनों में हिस्सा लेने वाले कलाकार केवल हिंदू नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में मुस्लिम हैं। उनके लिए रामायण महज एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि कर्तव्य, नैतिकता और सत्य की जीत का संदेश देने वाला महाकाव्य है। वे इसे किसी एक मजहब तक सीमित नहीं मानते।

सेना की प्रेरणा और गरुड़ का सम्मान

इंडोनेशिया की संस्कृति में भगवान हनुमान का विशेष स्थान है। दावा किया जाता है कि वहां की सेना अपनी पासिंग आउट परेड के दौरान साहस और निष्ठा के प्रतीक के रूप में हनुमान जी के समक्ष नतमस्तक होती है।

इतना ही नहीं, इंडोनेशिया का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य भिन्नेका तुंग्गल ईका (अनेकता में एकता) प्राचीन जावानी संस्कृत से लिया गया है। वहां के राष्ट्रीय प्रतीक में गरुड़ पंचशील का उपयोग किया जाता है और देश की राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम भी गरुड़ एयरलाइन्स है।

बाली: आज भी हिंदू आस्था का केंद्र

इंडोनेशिया का बाली द्वीप आज भी हिंदू बहुल क्षेत्र है, जहां भगवान राम और हनुमान की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी यात्रा के दौरान प्रम्बानन मंदिर पहुंचकर शिव की महिमा का गुणगान किया। यह दौरा साबित करता है कि आस्था और सांस्कृतिक विरासत का आपसी सम्मान किस तरह दो देशों को अटूट संबंधों में बांध सकता है।

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