अभी नहीं टला अल नीनो का खतरा: मॉनसून में सुधार के बावजूद खरीफ बुवाई 91.95 लाख हेक्टेयर पीछे
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मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन बुवाई में सुस्ती पिछले एक हफ्ते में देश के कई राज्यों में सक्रिय हुए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने राहत की उम्मीदें जगाई हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में तेज बारिश के बाद जून की 33 प्रतिशत की कमी जुलाई की शुरुआत तक घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, देश के 166 बड़े जलाशयों में जल स्तर पिछले साल के मुकाबले कम बना हुआ है, जो चिंता का विषय है।

बुवाई का हाल: लक्ष्य से पीछे किसान कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश भर में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो पाई है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मॉनसून में देरी का सबसे ज्यादा असर सोयाबीन और कपास की बुवाई पर पड़ा है।

सरकार की विशेष निगरानी में 178 जिले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति पर नजर रखने के लिए हाई-लेवल बैठकें शुरू कर दी हैं। कम बारिश वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर अब 178 रह गई है। मंत्रालय ने 15 अतिरिक्त जिलों की भी पहचान की है, जहां बारिश की कमी से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

किसानों को मिली सलाह: फसल चक्र में बदलाव कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर मंगलवार को इसकी समीक्षा की जा रही है।

अल नीनो की चुनौती के लिए पुख्ता इंतजाम अल नीनो के जोखिम को देखते हुए सरकार ने अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी थी। किसी भी संकट से निपटने के लिए 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है। साथ ही, किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए वित्तीय सहायता और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

आगे क्या? मौसम विभाग और जलवायु मॉडलों का मानना है कि अल नीनो का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय का अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप सक्रिय रहकर फसलों और बाजार की स्थिति की पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में किसानों को कम से कम नुकसान हो।

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