अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसे ऑपरेशन हार्ड बॉल नाम दिया गया है। इस अभियान का मुख्य निशाना लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग है। FBI ने इन पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और विदेशों में संगठित अपराध चलाने का आरोप लगाया है।
इस अभियान के तहत FBI ने कुल 37 भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। इसमें से 24 लोगों को कैलिफोर्निया से गिरफ्तार भी किया गया है। FBI का दावा है कि ये लोग अमेरिका, कनाडा और यूरोप में फैले संगठित अपराधी नेटवर्क का हिस्सा हैं और अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
FBI ने लॉरेंस और गोल्डी को निज्जर की हत्या का दोषी माना है। हालांकि, यह दावा कई सवाल खड़े करता है। जिस कनाडा की धरती पर निज्जर की हत्या हुई, वहां की सरकार पहले ही यह मान चुकी है कि निज्जर की हत्या में किसी भारतीय आधिकारिक कनेक्शन के ठोस सबूत नहीं हैं। फिर तीन साल बाद FBI का यह दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैरानी पैदा कर रहा है।
जांच एजेंसी का दावा है कि लॉस एंजिल्स में लॉरेंस गैंग कोकीन का एक बड़ा सप्लायर बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि लॉस एंजिल्स में ड्रग्स सप्लाई के लिए मेक्सिको के बड़े गैंग्स और स्थानीय अमेरिकी गैंग्स पहले से सक्रिय हैं। बावजूद इसके, FBI का सारा फोकस भारतीय गैंगस्टर्स पर है, जो इस पूरे ऑपरेशन के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
जानकारों का मानना है कि इस कार्रवाई के पीछे केवल अपराध रोकना मकसद नहीं है। भारत में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वॉन डाइक इस खेल का मुख्य मोहरा हो सकता है। मैथ्यू को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था, उस पर पूर्वोत्तर में भारत विरोधी गुटों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग देने के गंभीर आरोप हैं।
मैथ्यू वॉन डाइक का इतिहास संदिग्ध रहा है; उस पर पूर्व में लीबिया में विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग देने के आरोप लगे हैं और कई विश्लेषकों का मानना है कि वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA से जुड़ा हो सकता है। भारत में उसके पकड़े जाने के बाद से ही अमेरिकी दूतावास लगातार उसकी रिहाई और कॉन्सुलर एक्सेस के लिए दबाव बना रहा है।
माना जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ अचानक यह बड़ी कार्रवाई भारत पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है ताकि भारत मैथ्यू वॉन डाइक को रिहा करने के लिए मजबूर हो जाए। हालांकि, भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
CIA के पूर्व निदेशक माइक पॉम्पियो का वह कबूलनामा आज भी चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा था, जब मैं CIA निदेशक था, तब हम झूठ बोलते थे, धोखा देते थे और चोरी भी करते थे। ऐसे में ऑपरेशन हार्ड बॉल महज एक कानूनी कार्रवाई है या किसी बड़े कूटनीतिक खेल का हिस्सा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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— Zee News (@ZeeNews) July 8, 2026
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