ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर डील के बावजूद हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा है। सवाल यह है कि आखिर ईरान शांति क्यों नहीं चाहता? विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के मौजूदा शासकों के लिए जंगी माहौल कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फायदा है।
तेल की बिक्री और बढ़ती कमाई अमेरिका ने ईरानी तेल पर छूट खत्म कर दी है, लेकिन इसका ईरान को बड़ा नुकसान नहीं हो रहा है। चीन जैसे देशों को ईरान अभी भी अपना तेल बेच रहा है। हालांकि उसे डिस्काउंट देना पड़ता है, लेकिन जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे यह नुकसान भरपाई हो जाता है। जानकारों के मुताबिक, ईरान इस तरह प्रति बैरल 65-70 डॉलर कमाकर अरबों डॉलर का राजस्व जुटा रहा है।
खामेनेई अब बने नेशनल हीरो इजरायल और अमेरिका के हमलों ने ईरान की जनता का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। जो लोग कभी शासन के खिलाफ थे, वे अब एक नए राष्ट्रवाद के तहत खामेनेई और आईआरजीसी (IRGC) के समर्थन में एकजुट हो गए हैं। शासन विरोधी प्रदर्शनों की जगह अब सामूहिक आक्रोश ने ले ली है, जिससे ईरान के शासकों की पकड़ और मजबूत हो गई है।
घरेलू संकटों से ध्यान भटकाने का दांव ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली चरम पर है। युद्ध की स्थिति में जनता की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। लोग अपनी जान बचाने और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानने लगते हैं, जिससे शासन पर उठने वाले सवालों का शोर दब जाता है। यह जनता के गुस्से को आंतरिक समस्याओं से हटाकर बाहरी दुश्मन की तरफ मोड़ने का एक अचूक तरीका है।
प्रॉक्सी गुटों और हथियारों की ब्रांडिंग मिसाइलें चलने से लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और गाजा में हमास जैसे ईरान समर्थित प्रॉक्सी गुटों का हौसला बढ़ता है। इससे पूरे क्षेत्र में ईरान का रिमोट-कंट्रोल दबदबा बना रहता है। इसके साथ ही, इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ अपने मिसाइलों और ड्रोन्स (जैसे शाहेद) का लाइव प्रदर्शन करके ईरान अंतरराष्ट्रीय हथियारों के बाजार में अपनी साख भी बना रहा है।
इजरायल-अरब रिश्तों पर ब्रेक ईरान का एक बड़ा लक्ष्य अरब देशों और इजरायल के बीच बढ़ती नजदीकियों को रोकना है। युद्ध और फिलिस्तीन का मुद्दा गरमाए रहने से सऊदी अरब जैसे देश इजरायल के साथ किसी भी नए शांति समझौते (अब्राहम एकॉर्ड्स) से दूरी बना रहे हैं। यह भू-राजनीतिक रूप से ईरान के लिए सबसे बड़ी जीत है।
परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक धुरी जंग के बहाने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने का ठोस आधार मिल गया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार करते हुए वह यूरेनियम संवर्धन जारी रख सकता है। इसके अलावा, अमेरिका के खिलाफ इस तनाव ने ईरान को रूस और चीन के और अधिक करीब ला खड़ा किया है, जिससे वह खुद को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी सामरिक धुरी के रूप में पेश कर रहा है।
संक्षेप में, ईरान के लिए मिसाइलें चलाना केवल युद्ध नहीं, बल्कि अपना वर्चस्व बनाए रखने, आर्थिक लाभ कमाने और वैश्विक राजनीति में खुद को अपरिहार्य बनाने का एक सोची-समझी नीति है।
IRAN ESCALATION ALERT: Massive US strikes while millions in Iran demand revenge is a recipe for catastrophic war
— Robert A. Pape (@ProfessorPape) July 8, 2026
The MOU is dead
Iran could strike Gulf infrastructure and Red Sea shipping now, forcing Trump up the escalation ladder
Trump gloats, chaos is coming pic.twitter.com/Oeqy8b6keI
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