दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चुपचाप एक ऐसा कदम उठाया है, जो भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो वर्षों में 35 देशों को एक विशेष ग्रिड से जोड़ लिया है, जो भारत की क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को सुरक्षित करेगा।
चुपचाप पूरा हुआ मिशन जून 2024 में अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही पीएम मोदी ने एक रणनीतिक मिशन पर काम करना शुरू कर दिया था। इस मिशन का मकसद उन देशों के साथ गठबंधन बनाना था, जिनके पास भविष्य की तकनीक के लिए अनिवार्य रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार है। हाल ही में इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इस दिशा में एक बड़ी सफलता मिली, जहां भारत ने निकेल, स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण में निवेश का समझौता किया।
क्यों जरूरी है यह ग्रिड? आज की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस सिस्टम और स्मार्टफोन पूरी तरह से क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट) पर निर्भर हैं। दुनिया साफ ऊर्जा (Clean Energy) की ओर बढ़ रही है, जिसके लिए इन खनिजों की सप्लाई चेन में स्थिरता होना अनिवार्य है। ऐसे में 35 देशों का यह ग्रिड भारत के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की नींव भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए पहले ही नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) लॉन्च कर चुका है। जनवरी 2025 में शुरू किया गया यह मिशन 2031 तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि किसी बाहरी भू-राजनीतिक संकट में देश की विकास यात्रा न थमे।
चीन के प्रभुत्व को चुनौती वर्तमान में दुनिया के 80-90% क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग पर चीन का नियंत्रण है। वैश्विक आपूर्ति में भारत की वर्तमान हिस्सेदारी महज 3.3% है, जिसे बढ़ाने के लिए पीएम मोदी का यह 35 देशों वाला ग्रिड एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। यह न केवल भारत की निर्भरता को कम करेगा, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जरूरी कच्चा माल भी सुनिश्चित करेगा।
निष्कर्ष क्रिटिकल मिनरल्स अब केवल खनिज नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति बन चुके हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता के बीच पीएम मोदी की यह कूटनीति भारत को एक सुरक्षित और मजबूत आर्थिक भविष्य की ओर ले जा रही है।
#WATCH | Jakarta, Indonesia: PM Narendra Modi says, In today s era, supply chain resilience in technology is of great importance. A significant agreement has also been reached to further strengthen supply chains in the critical minerals and steel sectors. New partnerships are… pic.twitter.com/2UNNT7CGsE
— ANI (@ANI) July 7, 2026
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