नर्मदा जल विवाद का अंत: राजस्थान देगा गुजरात को 550 करोड़, जानें क्या बदलेगा?
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राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच पिछले 47 वर्षों से चला आ रहा नर्मदा जल विवाद अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए इस वन-टाइम सेटलमेंट समझौते ने सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ी वित्तीय उलझनों को सुलझा दिया है। इस समझौते के तहत राजस्थान अपनी हिस्सेदारी के रूप में गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा।

क्या पानी का बंटवारा बदल गया है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समझौता पानी के बंटवारे के बारे में नहीं है। राजस्थान का नर्मदा जल में हिस्सा पहले की तरह 0.50 एमएएफ (MAF) ही बना रहेगा। न तो पानी की मात्रा में कोई बढ़ोतरी हुई है और न ही कटौती। यह समझौता मुख्य रूप से परियोजना की लागत साझेदारी, निर्माण खर्च और पुनर्वास से जुड़े पांच दशक पुराने वित्तीय विवादों को निपटाने के लिए किया गया है।

क्यों था यह समझौता जरूरी?

1979 के न्यायाधिकरण के फैसले के बाद पानी का हिस्सा तो तय हो गया था, लेकिन बांध निर्माण और रखरखाव की लागत को लेकर राज्यों के बीच खींचतान जारी थी। गुजरात सरकार का तर्क था कि चूंकि मुख्य परियोजना उसके क्षेत्र में है, इसलिए अन्य राज्यों को लागत का अपना हिस्सा देना चाहिए। राजस्थान पर करीब 556 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित थी। इस अनसुलझे विवाद के कारण परियोजना के विकास कार्यों में अक्सर प्रशासनिक बाधाएं आती थीं।

पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों को होगा सीधा फायदा

भजनलाल शर्मा सरकार के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। इस विवाद के सुलझने से प्रशासनिक और वित्तीय बाधाएं दूर होंगी, जिससे जालोर, सांचौर, बाड़मेर और सिरोही जिलों में नर्मदा नहर तंत्र को मजबूत करने का काम तेज होगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य नहर के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाना है, जो दशकों से किसानों की एक बड़ी समस्या रही है।

आगे की राह: मानसून के पानी का होगा बेहतर उपयोग

नर्मदा जल विवाद समाधान के बाद अब सरकार का फोकस अतिरिक्त जल के भंडारण पर है। नर्मदा अवार्ड के नियमों के अनुसार, मानसून के दौरान मिलने वाला अतिरिक्त पानी राज्यों के निर्धारित हिस्से में नहीं जोड़ा जाता। सरकार अब इस अतिरिक्त पानी को वैज्ञानिक तरीके से स्टोर करने के लिए डीपीआर (DPR) तैयार कर रही है। यदि यह योजना सफल होती है, तो पश्चिमी राजस्थान के सूखे इलाकों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित होगी।

सहकारी संघवाद की जीत

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुआ यह समझौता सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पीएम मोदी ने भी इस समझौते पर खुशी जताते हुए कहा कि राज्यों के बीच जल विवादों को संवाद और सहमति से सुलझाना ही विकास का सबसे बेहतर रास्ता है।

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