भारत और इंडोनेशिया के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक रक्षा और रणनीतिक समझौतों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान हुई इन डील्स ने न केवल दोनों देशों की दोस्ती को नया आयाम दिया है, बल्कि चीन की विस्तारवादी नीतियों के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश की है।
इंडोनेशिया ने भारत के साथ लगभग 630 मिलियन डॉलर (लगभग 6 हजार करोड़ रुपये) के रक्षा पैकेज का औपचारिक अनुबंध किया है। इस डील के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइलें देगा। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। जानकारों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी रोकने के लिए भारत ने फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया की एक ब्रह्मोस बेल्ट तैयार कर दी है।
सबसे चिंताजनक खबर चीन के लिए सबांग पोर्ट के विकास को लेकर है। भारत और इंडोनेशिया मिलकर मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित सबांग बंदरगाह का विकास करेंगे। यह बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से मात्र 160 किलोमीटर दूर है। मलक्का स्ट्रेट वह समुद्री मार्ग है जिससे चीन का 80 प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है। इस मुहाने पर भारत की उपस्थिति का मतलब है कि भविष्य में किसी भी तनाव की स्थिति में चीन की व्यापारिक धमनियों पर भारत का सीधा नियंत्रण हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो भारत के सामाजिक और आर्थिक मॉडलों के मुरीद हैं। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि वे भारत के मिड-डे मील प्रोग्राम, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS), और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) का अनुसरण कर रहे हैं। यहां तक कि भारत इंडोनेशिया को ईवीएम (EVM) बनाने में भी सहयोग करेगा। यह भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर का प्रमाण है।
दोनों देशों के बीच केवल सैन्य समझौते ही नहीं हुए हैं, बल्कि सहयोग का दायरा बहुत विस्तृत है:
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने भले ही कॉपीराइट को दोस्ती के आगे पीछे छोड़ने की बात कही हो, लेकिन इसका संदेश साफ है। भारत और इंडोनेशिया अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा सहयोगी बन गए हैं। जिस तरह चीन स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति से भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था, उसी तरह भारत ने मलक्का स्ट्रेट के गेट पर अपनी पकड़ मजबूत कर चीन की घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले समय में सबांग-निकोबार की यह जोड़ी चीन के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक सिरदर्द साबित होगी।
#DNAमित्रों | इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट..मोदी की कॉपी क्यों करते हैं? चीन के पड़ोसी देश..भारत से ब्रह्मोस क्यों ले रहे?#DNA #DNAWithRahulSinha #PMModi #Indonesia #India @narendramodi@rahulsinhatv pic.twitter.com/0GUmb6Zk8J
— Zee News (@ZeeNews) July 7, 2026
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