रामलला के दान में 70 बार सेंध: एसआईटी रिपोर्ट ने खोली महापाप की परतें
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महान दार्शनिक फ्रांसिस बेकन ने कहा था कि सत्य जांच के हर बढ़ते कदम के साथ खुद को उजागर करता है। राम मंदिर में दान चोरी के मामले में यही सच अब सामने आ रहा है। एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने उन दावों की कलई खोल दी है, जो इस महापाप को महज एक छोटी चूक बता रहे थे।

45 दिनों में 70 बार डाका एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच दान पेटियों से 70 बार चोरी की गई। हर दिन औसतन दो बार की गई यह चोरी बिना किसी बाहरी शह के संभव नहीं थी। हिरासत में लिए गए तीन आरोपी—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे—अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। पूछताछ में यह साफ होगा कि इस पूरे खेल के पीछे के मास्टरमाइंड कौन हैं।

सबूत मिटाने की साजिश? इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य सीसीटीवी फुटेज का है। 27 अप्रैल से पहले का फुटेज डिलीट कर दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि 6 महीने की फुटेज सुरक्षित रखने के नियम के बावजूद केवल 45 दिन का बैकअप रखा गया। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सबूत मिटाने की सोची-समझी साजिश थी? प्रशासन की लापरवाही का आलम यह था कि कर्मचारियों को बैग और मोबाइल अंदर ले जाने की छूट थी और तलाशी लेने वाला कोई नहीं था।

ट्रस्ट की जवाबदेही पर उठे सवाल चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद भी विवाद थमता नहीं दिख रहा है। चंपत राय ने एक पत्र लिखकर एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका भी कटघरे में है, जो पुणे से जिम्मेदारी संभाल रहे थे लेकिन अयोध्या में व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं रख पाए। क्या पद पर बने रहने की जिद, जिम्मेदारी से बड़ी है?

टिन्नू यादव और सुरक्षा में सेंध रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का विशेष जिक्र है, जिसके पास बिना किसी आधिकारिक पद के दान पेटियों की चाबियां थीं। उसने अपने रिश्तेदार को पैसे गिनने की ड्यूटी पर लगवाया, जो चोरी का मुख्य जरिया बना। गणना कक्ष में सुरक्षा के मानक (SOP) बार-बार क्यों बदले गए और इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?

क्या है आगे का सच? एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है। चोरी का खुलासा होने से पहले ही करीब 81 लाख रुपये बरामद हो चुके थे। अब जांच का दायरा बड़ा है और यह पता लगाना बाकी है कि आस्था के नाम पर हुए इस घोटाले में और कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं। रामभक्तों के विश्वास को लगी इस चोट का घाव अभी गहरा है और जांच के अगले चरणों में कई और चेहरों से नकाब उठना तय है।

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