अंगक्लुंग: पीएम मोदी के हाथों में दिखा इंडोनेशिया का वह जादुई वाद्ययंत्र, जिसकी धुन में है एकता का संदेश
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस वीडियो में पीएम मोदी एक विशेष वाद्ययंत्र बजाते हुए नजर आ रहे हैं। इस उपहार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो ने उन्हें भेंट किया था। लोगों में इस अनोखे वाद्ययंत्र के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ गई है।

क्या है अंगक्लुंग? इस पारंपरिक वाद्ययंत्र का नाम अंगक्लुंग (Angklung) है। पहली नजर में यह बांस से बना एक साधारण सा फ्रेम लगता है, लेकिन इसकी बनावट इसे दुनिया के अनूठे वाद्ययंत्रों की श्रेणी में खड़ा करती है। यह पूरी तरह से बांस की नलियों से तैयार किया जाता है, जिनकी लंबाई अलग-अलग होती है।

कैसे बजता है यह यंत्र? अंगक्लुंग को बजाने के लिए किसी डंडी या हथौड़े की जरूरत नहीं होती। इसमें मधुर संगीत पैदा करने के लिए इसे बस हल्के से हिलाना पड़ता है। जैसे ही इसे हिलाया जाता है, बांस की नलियां आपस में टकराकर कंपन करती हैं और एक बेहद सुरीली ध्वनि उत्पन्न होती है।

टीम वर्क और एकता का प्रतीक इस वाद्ययंत्र की सबसे खास बात यह है कि एक अकेला अंगक्लुंग पूरी धुन नहीं बजा सकता। आमतौर पर एक अंगक्लुंग केवल एक या दो सुर ही निकाल पाता है। इसलिए, किसी भी संगीत की धुन को पूरा करने के लिए कई कलाकारों को अलग-अलग सुर वाले अंगक्लुंग लेकर एक साथ प्रदर्शन करना पड़ता है। यही कारण है कि इसे केवल एक वाद्ययंत्र नहीं, बल्कि आपसी सामंजस्य और एकता का प्रतीक माना जाता है।

यूनेस्को की विरासत में शामिल अंगक्लुंग का इतिहास सदियों पुराना है और इसकी उत्पत्ति इंडोनेशिया के पश्चिम जावा क्षेत्र में मानी जाती है। पुराने समय में वहां के लोग अच्छी फसल की कामना और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे बजाते थे। इसकी सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए, वर्ष 2010 में यूनेस्को ने अंगक्लुंग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। आज यह न केवल इंडोनेशिया की पहचान है, बल्कि दोस्ती का एक खूबसूरत कूटनीतिक संदेश भी है।

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