वाराणसी का बनारस रेलवे स्टेशन (पूर्व में मडुआडीह), जिसे 100 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक रूप दिया गया था, मॉनसून की पहली ही बारिश की परीक्षा में फेल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस वर्ल्ड क्लास स्टेशन की छत और फॉल्स सीलिंग से पानी झरने की तरह बहता दिखा।
प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर मची अफरातफरी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर स्थित बिजली के पंखों से पानी गिर रहा है। बारिश के दौरान यात्रियों के बीच अफरातफरी का माहौल रहा और प्लेटफॉर्म पर चलने या बैठने लायक जगह नहीं बची थी। यात्रियों ने इस स्थिति को विकास के दावों पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर शेयर किया।
रेलवे ने दी सफाई, कचरे को बताया जिम्मेदार वीडियो वायरल होने के बाद वाराणसी रेल मंडल ने सफाई देते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म के वैली गटर में सूखे पत्ते और पतंग की डोर फंस गई थी, जिससे जल निकासी का रास्ता ब्लॉक हो गया। विभाग का दावा है कि तुरंत कर्मचारियों को भेजकर इसे ठीक कर दिया गया है।
क्या 100 करोड़ के प्रोजेक्ट का ड्रेनेज सिस्टम इतना कमजोर है? रेलवे की सफाई के बावजूद लोगों में गुस्सा बरकरार है। सवाल उठ रहे हैं कि 100 करोड़ के आधुनिक निर्माण में क्या कोई ऐसा बैकअप सिस्टम नहीं था जो मामूली पत्तों और कचरे को झेल सके? फॉल्स सीलिंग और बिजली के उपकरणों के बीच से पानी का बहना न केवल खराब मेंटेनेंस, बल्कि इंजीनियरिंग की खामियों की ओर भी इशारा करता है।
साख पर सवाल यह घटना उस स्टेशन के साथ जुड़ी है जिसे देश का एक प्रमुख और मॉडल रेलवे स्टेशन माना जाता है। मॉनसून की पहली बारिश ने ही सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और दावों की पोल खोल दी है। फिलहाल रेलवे ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है, लेकिन यात्रियों के मन में सुरक्षा और सुविधा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
*माननीय प्रधानमंत्री जी आपने तो विकास की गंगा बहाने की बात कही थी,
— Rajeev Rai (@RajeevRai) July 7, 2026
अब देखिए ना ये रेस मन्त्रालय वाले आपके ही संसदीय क्षेत्र वाराणसी के स्टेशन पर झरना बहाने लगे 😊
अब देखो ना विनोद ऐसा क्यों कर रहे हैं ये लोग 😔@PMOIndia @RailMinIndia @AshwiniVaishnaw pic.twitter.com/TN4qo0dZgF
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