भविष्य के लिए टाइम कैप्सूल : अमेरिका ने जमीन में दफन किया 250 साल पुराना इतिहास
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अमेरिका ने अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक अनोखा ऐतिहासिक कदम उठाया है। फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलो का एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन में 10 फीट नीचे दफनाया गया है। इसे 2276 में खोला जाएगा, जब अमेरिका अपनी 500वीं वर्षगांठ मना रहा होगा।

कैप्सूल में क्या-क्या है संजोया गया?

यह टाइम कैप्सूल आधुनिक युग के आम लोगों की यादों का पिटारा है। इसमें राइट ब्रदर्स के विमान का एक टुकड़ा, व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत और कई ऐतिहासिक दस्तावेज रखे गए हैं। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि आज के दौर का समाज और संस्कृति कैसी थी।

क्यों खास है इसकी बनावट?

वैज्ञानिकों ने इसे बेलनाकार (सिलेंडर) आकार दिया है क्योंकि कोनों वाले बक्से समय के साथ कमजोर हो जाते हैं। इसे इंडियम धातु से बनाया गया है, जो एक नरम धातु है। यह धातु दबाव पड़ने पर खुद-ब-खुद छोटी दरारों को भर लेती है। साथ ही, कैप्सूल के अंदर नमी को 35 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है ताकि अंदर रखी वस्तुएं न तो सड़ें और न ही भुरभुरी होकर टूटें।

पानी से सुरक्षा का उल्टी बाल्टी वाला सिद्धांत

कैप्सूल को पानी से बचाने के लिए इसे एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर के भीतर रखा गया है। दोनों परतों के बीच हवा की एक ऐसी लेयर दी गई है जो पानी को अंदर घुसने से रोकेगी। यह तकनीक ठीक उसी सिद्धांत पर काम करती है, जैसे पानी में उलटी बाल्टी डुबोने पर अंदर हवा फंसी रहती है और पानी प्रवेश नहीं कर पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कैप्सूल कभी भीगा, तो इसका मतलब होगा कि पूरा फिलाडेल्फिया शहर डूब चुका है।

भारत का कालपात्र और उसका विवाद

टाइम कैप्सूल का कॉन्सेप्ट भारत के लिए नया नहीं है। 1973 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान दिल्ली के लाल किले के पास कालपात्र नाम का कैप्सूल दफनाया गया था। इसे 1,000 साल बाद खुलने के लिए बनाया गया था, जिसमें भारत के विकास और इतिहास के दस्तावेज थे।

हालांकि, 1977 में जनता पार्टी की सरकार आने के बाद इसे राजनीतिक विवाद के चलते बाहर निकलवा लिया गया। नई सरकार का आरोप था कि इसमें इतिहास को नेहरू-गांधी परिवार के नजरिए से पेश किया गया है। भारी बहस के बाद इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया और आज भी यह रहस्य बना हुआ है कि उस कैप्सूल में वास्तव में क्या सामग्री थी और उसे कहां रखा गया है।

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