अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, बैठक में हंगामे के बीच कई अहम फैसले
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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज हुई अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। मंदिर प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच ट्रस्ट की यह बैठक काफी गहमागहमी भरी रही।

चंपत राय का इस्तीफा मंजूर बैठक से प्राप्त शुरुआती जानकारी के अनुसार, चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट द्वारा मंजूर कर लिया गया है। इस बैठक में वे शामिल नहीं हुए। चंपत राय पर लगे कथित गबन के आरोपों के बाद ट्रस्ट के भीतर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई थी, जिसके बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।

गोपाल राव को बैठक से बाहर निकाला गया बैठक के दौरान उस समय ड्रामा देखने को मिला जब ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने अंदर जाने का प्रयास किया। उन्हें ट्रस्ट के अन्य सदस्यों द्वारा भीतर जाने से स्पष्ट रूप से रोक दिया गया। वरिष्ठ सदस्यों के कड़े रुख के बाद गोपाल राव को बिना बैठक में शामिल हुए बाहर निकलना पड़ा।

अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सस्पेंस चंपत राय के इस्तीफे की मंजूरी के बाद अब ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर भी गहन मंथन कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े अन्य पदाधिकारियों की भूमिका पर भी समीक्षा की जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

CEO की नियुक्ति पर नहीं बनी बात बैठक में यह सुझाव रखा गया था कि काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की जाए। लेकिन, चर्चा के बाद ट्रस्ट के सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। प्रबंधन का ढांचा फिलहाल पुराने स्वरूप में ही संचालित रहेगा।

सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीयता बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ ही मंदिर परिसर के आसपास बैरिकेडिंग की गई थी। बैठक की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी सदस्यों के मोबाइल फोन बाहर ही जमा करवा लिए गए थे ताकि कोई जानकारी बाहर लीक न हो।

आगे की राह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज की मौजूदगी में हो रही इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन और हालिया विवादों पर ट्रस्ट क्या ठोस निर्णय लेता है, इसका खुलासा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल, अयोध्या में आगामी प्रशासनिक सुधारों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

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