फीफा का यू-टर्न: ट्रंप के दखल के बाद बालोगुन का रेड कार्ड रद्द, फुटबॉल जगत में मचा बवाल
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विश्व फुटबॉल में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत, अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया है। फीफा के इस फैसले के बाद बालोगुन पर लगा एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में खेलने के लिए उपलब्ध होंगे।

क्या था मामला? अमेरिका और बोस्निया-हर्जेगोविना के बीच हुए मैच में बालोगुन को विरोधी खिलाड़ी तारिक मुहारेमोविच को चोट पहुंचाने के आरोप में सीधा रेड कार्ड दिखाया गया था। रेफरी राफेल क्लॉस ने VAR की समीक्षा के बाद यह कड़ा फैसला लिया था, जिसके तहत बालोगुन का अगले मैच से बाहर होना तय माना जा रहा था।

ट्रंप की एंट्री और फीफा का यू-टर्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा हस्तक्षेप बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि मैच के बाद ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बात की और मामले की दोबारा समीक्षा करने का आग्रह किया। इसके बाद फीफा ने नाटकीय रूप से बालोगुन का निलंबन हटा लिया। 1962 के बाद यह पहली बार है जब विश्व कप के दौरान ऐसी घटना हुई है।

ट्रंप का आभार और आलोचनाओं का दौर फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फीफा को सही काम करने के लिए धन्यवाद दिया। वहीं, खेल जगत में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। आलोचकों का मानना है कि एक राजनेता के हस्तक्षेप से खेल संस्था का निर्णय बदलना खेल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बेल्जियम का गुस्सा और फीफा पर तंज फीफा के इस फैसले से बेल्जियम फुटबॉल संघ बेहद नाराज है। बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया ने व्यंग्य करते हुए कहा कि, उन्हें नहीं पता था कि फीफा में 5 जुलाई को अप्रैल फूल मनाया जाता है। बेल्जियम का तर्क है कि टूर्नामेंट में सभी टीमों के लिए नियम समान होने चाहिए और किसी एक खिलाड़ी के लिए अपवाद बनाना गलत परंपरा है।

अब आगे क्या? इस विवाद के बीच अब सभी की निगाहें अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले नॉकआउट मुकाबले पर हैं। तीन गोल कर चुके बालोगुन का मैदान पर होना अमेरिकी टीम की ताकत बढ़ाएगा, लेकिन फीफा का यह फैसला लंबे समय तक फुटबॉल की पारदर्शिता और राजनीति के प्रभाव को लेकर बहस का केंद्र बना रहेगा।

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