अली खामेनेई की आखिरी विदाई: तीन बेटों के आंसू और मोजतबा की रहस्यमयी गैरमौजूदगी
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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को हाल ही में तेहरान में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान पूरा ईरान गम में डूबा नजर आया, लेकिन समारोह में मौजूद लोगों और दुनिया भर की नजरें एक खास चेहरे की तलाश करती रहीं—मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई।

अंतिम नमाज और सत्ता का शक्ति प्रदर्शन तेहरान में आयोजित अंतिम विदाई समारोह में ईरान की सत्ता के शीर्ष केंद्र मौजूद थे। वरिष्ठ शिया धर्मगुरु आयतुल्ला जाफर सोभानी ने नमाज-ए-जनाजा की रस्म पूरी कराई। इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष और न्यायपालिका प्रमुख समेत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के आला अधिकारी मौजूद रहे। यह जमावड़ा ईरान के राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य नेतृत्व की एकजुटता को दर्शाने के लिए काफी था।

तीन बेटों का दुख, मोजतबा रहे गायब अयातुल्ला अली खामेनेई के तीन बेटे—सैयद मुस्तफा, सैयद मसूद और सैयद मेयसाम—अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से भावुक देखे गए। तीनों ने अंतिम रस्मों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हालांकि, ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर और उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई का कहीं अता-पता नहीं था। उनकी गैरमौजूदगी ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सस्पेंस पैदा कर दिया।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा या इजरायली खौफ? मोजतबा खामेनेई की इस अनुपस्थिति के पीछे आधिकारिक तौर पर सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल की ओर से संभावित हमलों और उन्हें निशाना बनाए जाने के खतरे को देखते हुए ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखने का सख्त फैसला किया था। संवेदनशीलता को देखते हुए, सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा ही इस वक्त ईरान की पहली प्राथमिकता बनी हुई है।

तनाव की आंच: ट्रंप का बयान और समुद्री हलचल अंतिम संस्कार के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल कम नहीं रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान चर्चा का विषय बना, जिसमें उन्होंने नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नेतन्याहू जानते हैं कि बॉस कौन है। इस बयान ने पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल में आग में घी का काम किया है।

वहीं, होर्मुज स्ट्रेट में भी खौफ का साया दिखा। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई व्यापारिक जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में बदली हुई सत्तात्मक स्थिति और क्षेत्रीय तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार सतर्क मोड पर आ गया है, जो आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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