नेशनल शूटर से दमदार DM तक: कौन हैं 11 दिव्यांगों का सहारा बनीं IAS मेधा रूपम?
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गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम इन दिनों अपने मानवीय फैसलों के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में 11 दिव्यांग नागरिकों को लीगल गार्जियनशिप सर्टिफिकेट प्रदान कर एक संवेदनशील मिसाल कायम की है।

कौन हैं मेधा रूपम? 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी मेधा रूपम का नाम देश की प्रभावशाली महिला अफसरों में लिया जाता है। आगरा में जन्मीं मेधा की प्रारंभिक शिक्षा केरल में हुई। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है।

खेल के मैदान की शूटर अफसर मेधा रूपम केवल प्रशासनिक कौशल के लिए ही नहीं, बल्कि निशाना साधने में भी माहिर हैं। वे एक नेशनल लेवल की राइफल शूटर रह चुकी हैं। उन्होंने केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे और 2009 में नेशनल चैंपियनशिप में भी प्रतिभा दिखाई थी।

UPSC में पहले प्रयास में सफलता मेधा की सफलता का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने साल 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 10 (AIR 10) हासिल की थी। उनके पिता ज्ञानेश कुमार भी 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के पद पर तैनात हैं।

जिम्मेदारियों का लंबा अनुभव करियर की शुरुआत बरेली से करने के बाद उन्होंने मेरठ, लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में विभिन्न पदों पर सेवाएं दी हैं। वे हापुड़ और कासगंज की डीएम भी रह चुकी हैं। नोएडा की डीएम बनने से पहले, वे ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) में एडिशनल सीईओ के रूप में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और फिल्म सिटी जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी हैं।

दिव्यांगों के लिए लिया बड़ा फैसला हाल ही में एक समीक्षा बैठक के दौरान, मेधा रूपम ने 11 दिव्यांग व्यक्तियों को कानूनी संरक्षक (Legal Guardian) दिलाने की प्रक्रिया को मंजूरी दी। यह सर्टिफिकेट उन दिव्यांगों को सुरक्षा और कानूनी अधिकार प्रदान करने में मदद करता है जो खुद के निर्णय लेने में अक्षम हैं। साथ ही, उन्होंने लंबित आवेदनों को जल्द निपटाने के सख्त निर्देश भी दिए हैं।

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