सुबह ऑफिस, रात में Rapido: 5 घंटे की नींद और एक पिता का संघर्ष, जो आपको झकझोर कर रख देगा
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक Rapido राइडर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसे पढ़कर लोगों की आंखें नम हो रही हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि हम जिसे अपनी छोटी-छोटी परेशानियां समझते हैं, उनके मुकाबले दुनिया में लोग कितनी बड़ी लड़ाइयां लड़ रहे हैं।

कैसे सामने आई यह कहानी? इस मार्मिक वाकये को X (पूर्व में ट्विटर) पर शिखर नाम के एक यूजर ने साझा किया। शिखर को एक दिन ऑफिस पहुंचने में देरी हो रही थी, इसलिए उन्होंने Rapido बाइक बुक की। राइडर बहुत जल्दी पहुंच गया और बार-बार कॉल करने लगा। शुरुआत में शिखर को लगा कि शायद उसे अगली सवारी की जल्दी है, लेकिन रास्ते में हुई बातचीत ने उनकी सोच बदल दी।

20 हजार की कमाई और दिव्यांग बेटे का इलाज बातचीत के दौरान राइडर ने बताया कि वह एक निजी कंपनी में काम करता है, जहां से उसे महीने के 20 हजार रुपये मिलते हैं। इतने पैसे में पांच लोगों के परिवार (पत्नी और तीन बच्चे) का खर्च चलाना नामुमकिन है। उसका एक बेटा जन्म से दिव्यांग है, जिसकी दवाइयों और इलाज पर ही हर महीने 10 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। घर को चलाने के लिए उसने Rapido को अपना सहारा बनाया।

दिनचर्या: सुबह 6 से रात 11 बजे तक का सफर इस शख्स की दिनचर्या बेहद कठिन है। वह सुबह 6 बजे घर से निकलता है। ऑफिस जाने से पहले वह घंटों बाइक चलाता है, फिर पूरे दिन ऑफिस में काम करता है। ऑफिस खत्म होने के बाद वह फिर से बाइक लेकर निकल पड़ता है और रात 11 बजे घर लौटता है। जब उससे पूछा गया कि वह आराम कब करता है, तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि पिछले 8 महीनों से वह रोज सिर्फ 5 घंटे ही सो पा रहा है।

इंसानियत और संघर्ष का सबक इस शख्स के चेहरे पर न तो कोई शिकायत थी और न ही हालात से हार मानने का डर। उसकी प्राथमिकता सिर्फ उसके परिवार की खुशियां हैं। इस कहानी पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने उसे असली हीरो बताया है। यह कहानी उन लाखों मेहनतकश लोगों का प्रतिबिंब है, जो अपने सपनों और आराम की बलि देकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे कोई न कोई संघर्ष जरूर छिपा होता है।

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