भारतीय चयनकर्ताओं पर उठे गंभीर सवाल, क्या रिंकू सिंह को दरकिनार करना टीम इंडिया पर पड़ रहा भारी?
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भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज खेल रही है। इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ हुई टी20 सीरीज में भी भारत का प्रदर्शन चर्चा का विषय रहा है। इन दोनों सीरीज के लिए टीम इंडिया के चयनकर्ताओं का एक फैसला लगातार कटघरे में है—टीम के सबसे भरोसेमंद फिनिशर रिंकू सिंह को बाहर करना।

रिंकू सिंह बनाम तिलक वर्मा: चयन पर उठते सवाल रिंकू सिंह, जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 की विजेता टीम का अहम हिस्सा थे, आज प्लेइंग-11 से बाहर हैं। उनकी जगह उपकप्तान तिलक वर्मा को फिनिशर की भूमिका दी गई है। फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि रिंकू का आईपीएल में केकेआर के लिए प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी उन्हें इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त बनाती थी, लेकिन चयनकर्ताओं ने एक धीमे खिलाड़ी पर भरोसा जताया है।

तिलक वर्मा का फ्लॉप शो बना टीम की मुसीबत फिनिशर के रूप में तिलक वर्मा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। आयरलैंड के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने 21 गेंदों पर महज 19 रन बनाए (स्ट्राइक रेट 90.48)। दूसरे मैच में भी उनकी 46 गेंदों पर 55 रनों की धीमी पारी टीम की हार का कारण बनी। इंग्लैंड के खिलाफ भी उनका स्ट्राइक रेट 100 का रहा, जो टी20 प्रारूप के लिहाज से बेहद धीमा है। फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें टुक-टुक खिलाड़ी बताकर टीम प्रबंधन के फैसले पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।

आंकड़े क्या कहते हैं? रिंकू सिंह का टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का स्ट्राइक रेट 155.7 है, जो एक फिनिशर के लिए आदर्श माना जाता है। उन्होंने भारत के लिए 45 मैचों में अपनी उपयोगिता साबित की है। इसके विपरीत, तिलक वर्मा का करियर स्ट्राइक रेट 142.7 है, जो टी20 के आधुनिक दौर में काफी कम है। नंबर 4 पर खेलने के आदी तिलक को अचानक नंबर 5 पर फिनिशर की जिम्मेदारी देना प्रयोग के तौर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

चयनकर्ताओं की साख पर सवाल सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा चरम पर है। क्रिकेट प्रशंसकों का तर्क है कि जिस खिलाड़ी (रिंकू) ने मुश्किल परिस्थितियों में भारत को जीत दिलाई, उसे बाहर बैठाकर कम स्ट्राइक रेट वाले खिलाड़ी को मौका देना समझ से परे है। अब देखना यह है कि क्या अगले मैचों में चयनकर्ता अपनी गलती सुधारते हैं या फिर टीम इंडिया को अपनी फिनिशिंग समस्या के कारण आगे भी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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