ईरान पहुंचे दिग्गज भारतीय नेता और धर्मगुरु, दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई को दी अंतिम श्रद्धांजलि
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ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए तेहरान में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा लगा है। भारत से भी एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और कई प्रमुख धर्मगुरु तेहरान पहुंच चुके हैं, जिन्होंने दिवंगत नेता के ताबूत के सामने नमन कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ईरान सरकार के निमंत्रण पर भारत सरकार की ओर से एक विशेष प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा गया। इसमें बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल रहे। विपक्षी दलों का प्रतिनिधित्व करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और सांसद पवन खेड़ा भी वहां पहुंचे।

कश्मीर से भी पहुंचे नेता और धर्मगुरु जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने तेहरान पहुंचकर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरी शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन मोसावी अल सफावी भी मौजूद रहे। घाटी के कई अन्य शिया धर्मगुरुओं और नेताओं को भी निमंत्रण भेजा गया था।

विविध धर्मों के धर्मगुरुओं की प्रार्थना तेहरान की इमाम खुमैनी ग्रैंड मस्जिद में रखे गए पार्थिव शरीर के सामने न केवल राजनेता, बल्कि भारत के विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु भी पहुंचे हैं। हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्मगुरुओं द्वारा सामूहिक प्रार्थनाओं और श्रद्धांजलि की तस्वीरें ईरान के आधिकारिक हैंडल द्वारा साझा की गई हैं। यह दृश्य भारत और ईरान के बीच गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

अंतिम संस्कार की 6 दिवसीय प्रक्रिया दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर को इमाम हुसैन की दरगाह से लाए गए लाल झंडे से ढका गया है, जो प्रतिरोध और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई 2026 तक चलेगी। इस दौरान तेहरान के अलावा कोम, कर्बला और नजफ जैसे प्रमुख शहरों में रस्में निभाई जाएंगी। अंतिम विदाई उनके होमटाउन मशहद में होगी।

बेटे की अनुपस्थिति पर चर्चा 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई की मृत्यु हुई थी। सुरक्षा कारणों और युद्ध की स्थिति के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। अब खबरें हैं कि खामेनेई के बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सुरक्षा चिंताओं के चलते अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे। तेहरान की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग काली पोशाक में जुटकर अपने नेता को विदाई दे रहे हैं।

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