ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन पूरे देश के लिए एक गहरा सदमा है। तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह है कि एक युग का अंत हो गया है। फूलों से सजे मंच पर जब उनका ताबूत लाया गया, तो समर्थकों की भीड़ बेकाबू हो गई। हर कोई अपने रहबर को एक आखिरी बार छूने और उन्हें नमन करने के लिए व्याकुल दिखा।
गमगीन है तेहरान, सुरक्षा के कड़े घेरे खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं। राजधानी तेहरान को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शनिवार से सोमवार तक सरकारी और निजी दफ्तर बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, सुरक्षा कारणों और अंतिम यात्रा के चलते तेहरान का एयरस्पेस बंद कर दिया गया है और शहर के मुख्य हिस्सों में निजी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
अंतिम यात्रा: तेहरान से मशहद तक का सफर दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर शनिवार और रविवार को तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। इसके बाद, उन्हें शिया शिक्षा के केंद्र कोम ले जाया जाएगा। रस्मों के अगले चरण में, खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के पवित्र शहर कर्बला ले जाया जाएगा, जो शिया मुसलमानों के लिए प्रतिरोध और शहादत का प्रतीक है। अंत में, 9 जुलाई को उन्हें उनके जन्मस्थान मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति और दुनिया की नजरें इस शोक की घड़ी में भारत के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों ने भी तेहरान पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने खामेनेई को एक ऐसा साहसी नेता बताया, जिसने दबे-कुचले लोगों के लिए आवाज उठाई। वहीं, मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस अंतिम संस्कार पर टिकी हैं।
गार्ड्स प्रमुख की रहस्यमयी वापसी इस आयोजन के दौरान सबका ध्यान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी की उपस्थिति ने खींचा। युद्ध शुरू होने के बाद से वे पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए। वाहिदी ने बेहद भावुक होकर ताबूत पर हाथ रखकर प्रार्थना की। जानकारों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वे अब तक खुद को चर्चा से दूर रखे हुए थे, लेकिन इस अंतिम विदाई में उनकी मौजूदगी ने कई सियासी संदेश दिए हैं।
An honour for me to be here in Tehran to express my deepest condolences & solidarity on the martyrdom of Iran’s Supreme Leader Ayatollah Sayyed Ali Khamenei- a revered leader who dared to stand against the tide & fought for the oppressed. pic.twitter.com/dyfRbNXhsr
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) July 3, 2026
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