11 साल के बच्चे ने रौंदे 10 बौद्ध भिक्षु: थाईलैंड में सड़क पर खौफ का मंजर, कानूनी दांव-पेच में फंसा मामला
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थाईलैंड के मुकदाहान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ 11 साल के एक नाबालिग बच्चे द्वारा चलाई जा रही पिकअप वैन ने बौद्ध भिक्षुओं के एक धार्मिक जुलूस को कुचल दिया। इस भीषण हादसे में अब तक 10 भिक्षुओं की मौत हो चुकी है।

हादसे का खौफनाक मंजर पुलिस के अनुसार, कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु सड़क के किनारे अपनी धार्मिक पदयात्रा पर थे। तभी तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर सीधे भीड़ में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई भिक्षु हवा में उछल गए। पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि पांच अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान जान गंवाई। तीन भिक्षु अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

बिना अनुमति घर से ली थी गाड़ी जांच में सामने आया है कि 11 साल का यह बच्चा अपने माता-पिता की पिकअप वैन बिना अनुमति के लेकर घर से निकल गया था। जब तक परिजनों को गाड़ी के गायब होने का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चा गाड़ी पर नियंत्रण खो बैठा और बड़ा हादसा हो गया।

बच्चे पर क्यों नहीं होगी सजा? मुकदाहान सिटी पुलिस के प्रमुख प्रयुत रुआनथोंगकम के मुताबिक, थाईलैंड के कानून के अनुसार 12 साल से कम उम्र के बच्चों पर कोई भी आपराधिक जिम्मेदारी नहीं तय की जा सकती। संभव है कि बच्चा किसी विशेष मानसिक स्थिति (स्पेशल चाइल्ड) से गुजर रहा हो, जिसकी मेडिकल जांच की जा रही है। ऐसे में कानूनी रूप से उसे दोषी ठहराना संभव नहीं लग रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया दर्द हादसे में बाल-बाल बचे भिक्षु फ्रा सोमपोंग ने बताया, हम मंत्र जाप करते हुए चल रहे थे। अचानक मैंने देखा कि एक बच्चा गाड़ी चला रहा है और वह तेजी से हमारी ओर बढ़ा। मैं और एक साथी कूदकर बच गए, लेकिन पीछे चल रहे भिक्षुओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

पूरे देश में शोक की लहर थाईलैंड एक बौद्ध बहुल देश है, जहाँ भिक्षुओं को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। इस घटना से पूरा देश मर्माहत है। स्थानीय अस्पताल ने घायलों के इलाज के लिए लोगों से रक्तदान की अपील की है। मुकदाहान के गवर्नर वोरायन बुन्नारात ने इस घटना को समाज और माता-पिता के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहुंच से वाहनों को दूर रखना हर अभिभावक की नैतिक जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

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