ईरान में शोक का सैलाब: अली खामेनेई की अंतिम विदाई की भव्य तैयारी, ताबूत पर लिखे संदेश ने खींचा ध्यान
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तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा देश सड़कों पर उतर आया है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाले इस शोक कार्यक्रम के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शुक्रवार को खामेनेई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए तेहरान के ‘ग्रैंड मोसाल्ला’ धार्मिक परिसर में रखा गया है।

सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब

राजधानी तेहरान का नजारा गमगीन है। हाथों में अली खामेनेई की तस्वीरें और काले कपड़े पहने हजारों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए जमा हुए हैं। इस दौरान लोग ईरानी झंडे लहराते हुए पारंपरिक भजन गा रहे हैं और अपने नेता को याद कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भी इस अंतिम संस्कार पर नजरें टिकी हैं, जिसमें कई देशों के राजनयिकों के शामिल होने की उम्मीद है।

ताबूत पर लिखे पवित्र संदेश का महत्व

दिवंगत नेता के ताबूत की पहली तस्वीरें सामने आई हैं, जो बेहद भावुक करने वाली हैं। ताबूत को एक पवित्र लाल झंडे से लपेटा गया है, जिसे इमाम हुसैन के मकबरे से लाया गया है। इस झंडे पर सफेद अक्षरों में संदेश लिखा है, जिसे ईरानी सरकार प्रतिरोध, बलिदान और सत्य के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक बता रही है।

राष्ट्रपति की एकता की अपील

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने नागरिकों से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, यह शहादत अंत नहीं, बल्कि देश की एकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस अंतिम यात्रा में शामिल होकर दुनिया को ईरान की ताकत और अटूट विश्वास का संदेश दें।

क्या है अंतिम संस्कार का पूरा कार्यक्रम?

यह शोक कार्यक्रम कई दिनों तक चलेगा और कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा। इसमें ईरान के तेहरान, कोम और मशहद के अलावा इराक के नजफ और कर्बला शहर भी शामिल हैं। यह आयोजन उस हवाई हमले के चार महीने बाद हो रहा है, जिसमें खामेनेई की मृत्यु हुई थी।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

इस कार्यक्रम को ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सुरक्षा अभियानों में से एक माना जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर हवाई निगरानी (ड्रोन या हेलीकॉप्टर) का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

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