राम मंदिर चंदा चोरी मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। हाल ही में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के गेस्ट हाउस और उनके करीबी सहयोगियों की कार्यप्रणाली पर कई चौंकाने वाले सवाल खड़े किए हैं।
सीसीटीवी से बचकर दान? स्टिंग के दौरान, खुद को चंपत राय का करीबी बताने वाले प्रद्युम्न नामक व्यक्ति ने दावा किया कि दान सीधे चंपत राय (जिन्हें ट्रस्ट में बाबूजी कहा जाता है) तक पहुंचाया जा सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि सहयोगियों ने यह तक कहा कि यदि दानदाता सीसीटीवी कैमरों से बचकर दान देना चाहता है, तो उसकी भी व्यवस्था की जा सकती है।
बिना बिल के सोना-चांदी स्वीकार जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के सहयोगी बिना किसी खरीद बिल के भारी मात्रा में सोना और चांदी दान के रूप में लेने को तैयार थे। शर्त केवल एक थी—एक हलफनामा, जिसमें दानदाता को यह लिखकर देना होगा कि दान की गई वस्तु पर उसका कोई अधिकार नहीं रहेगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान दान की शुद्धता या उसके स्रोत की जांच करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
क्या बाबूजी अभी भी कमान संभाले हुए हैं? हालांकि चंपत राय ने चंदा चोरी का विवाद सामने आने के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन स्टिंग बताता है कि गेस्ट हाउस में वे अभी भी सक्रिय हैं। सहयोगियों के अनुसार, वे लगातार बैठकें कर रहे हैं और पूरा नेटवर्क उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में काम कर रहा है।
आरोपियों के पास अचानक करोड़ों की संपत्ति पुलिस जांच में पकड़े गए आरोपियों की आर्थिक स्थिति ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। अविनाश शुक्ला जैसे आरोपी, जो पहले अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए संघर्ष कर रहे थे, उनके पास से लाखों की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद होना यह इशारा करता है कि वे महज मोहरे हो सकते हैं। पुलिस ने अब तक एक करोड़ से अधिक की नकदी और कीमती आभूषण बरामद किए हैं।
SIT की जांच और पुलिस कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे नेटवर्क की परतें उखाड़ने में जुटी है। अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे व अनुकल्प मिश्रा जैसे आरोपियों से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ है। पुलिस ने चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है, लेकिन अभी तक ट्रस्ट की ओर से इस स्टिंग ऑपरेशन और लगे गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या यह चंदा चोरी महज कुछ लोगों की साजिश है या ट्रस्ट के भीतर एक समानांतर गुप्त नेटवर्क सक्रिय था? यह सवाल अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
Operation Chanda Chori : TIMES NOW S.I.T Investigation
— TIMES NOW (@TimesNow) July 2, 2026
- Revealed: Champat Rai still in charge
- Trust employee claims media is lying
- Champat Rai is still holding meetings
Watch as @Madhavgk takes us through the report. pic.twitter.com/ET2z8xEZjQ
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