IIT के अनुभवी डॉ. मुनीम लतीफी संभालेंगे पूर्णिया पॉलिटेक्निक की कमान, बदलेगी संस्थान की तस्वीर
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पूर्णिया: राजकीय पॉलिटेक्निक पूर्णिया में नेतृत्व का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। आईआईटी पटना से पीएचडी होल्डर डॉ. मुनीम लतीफी ने संस्थान के नए प्रधानाचार्य के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया है। उनके आने से छात्रों और शिक्षकों में नई उम्मीदें जगी हैं।

आईआईटी का अनुभव और शैक्षणिक दृष्टि डॉ. मुनीम लतीफी यांत्रिक अभियांत्रिकी (Mechanical Engineering) में आईआईटी पटना से पीएचडी प्राप्त हैं। तकनीकी शिक्षा में उनका गहरा अनुभव और शैक्षणिक पृष्ठभूमि संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे पहले वे इसी संस्थान में विभागाध्यक्ष (प्रभारी) के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिससे वे यहां की चुनौतियों और जरूरतों से पहले से ही भली-भांति परिचित हैं।

बदलाव की बयार: उम्मीदों का नया दौर नए नेतृत्व के साथ संस्थान में कई सकारात्मक बदलावों की चर्चा है। शिक्षकों और कर्मचारियों को उम्मीद है कि डॉ. लतीफी के कार्यकाल में प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा। छात्रों को भी आधुनिक कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण मिलने की प्रबल संभावना है।

गरिमामय समारोह में हुआ पदभार हस्तांतरण पदभार ग्रहण समारोह अत्यंत गरिमामय रहा। निवर्तमान प्रधानाचार्य डॉ. संजय कुमार ने डॉ. मुनीम लतीफी को औपचारिक रूप से कार्यभार सौंपा। इस दौरान संस्थान के सभी संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे। सभी ने नए प्रधानाचार्य का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

निवर्तमान प्रधानाचार्य के योगदान को दी गई सराहना समारोह के दौरान निवर्तमान प्रधानाचार्य डॉ. संजय कुमार के कार्यकाल को भी याद किया गया। उपस्थित लोगों ने संस्थान के विकास में उनके द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कुमार के नेतृत्व में संस्थान ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं और अब डॉ. लतीफी इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

सीमांचल के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण कदम राजकीय पॉलिटेक्निक पूर्णिया सीमांचल का एक प्रमुख तकनीकी केंद्र है, जहाँ से हर साल सैकड़ों छात्र भविष्य की राह तलाशते हैं। डॉ. लतीफी की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि संस्थान की साख और छात्रों के करियर को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि डॉक्टर लतीफी का अनुभव संस्थान की दशा और दिशा को किस हद तक बदलता है।

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