भारत और पाकिस्तान के 117 प्रबुद्ध नागरिकों ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की बहाली और रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की अपील की गई है। इस पहल ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
अमरजीत सिंह दुलत का समर्थन इस पत्र के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत भी शामिल हैं। दुलत का मानना है कि बातचीत का रास्ता बंद रखना एक गलत कूटनीतिक रणनीति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह बात एक आम नागरिक के तौर पर कह रहे हैं।
आरएसएस के रुख का दिया हवाला दुलत ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र किया। उन्होंने कहा, जब आरएसएस के नेता पाकिस्तान से बात करने की बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं इस पर विचार हो रहा है। अगर वे ऐसा सोच रहे हैं, तो हमें भी सोचना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
आतंकवाद पर ही हो बातचीत आतंकवाद के मुद्दे पर दुलत ने भारत के कड़े रुख का समर्थन किया, लेकिन बातचीत के तरीके में बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, हमें इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह क्यों दे रहा है? कश्मीर और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते, इसलिए आइए हम आतंकवाद के मुद्दे पर ही सीधे इस्लामाबाद का सामना करें।
बातचीत न करना गलत विकल्प पूर्व रॉ चीफ ने जोर देकर कहा कि कूटनीति में शांति स्थापित करने के लिए अक्सर अपने विरोधियों से बात करना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि बातचीत का रास्ता खोलने से सकारात्मक माहौल बन सकता है, हालांकि इसके परिणाम क्या होंगे, यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन बातचीत न करना किसी भी सूरत में समाधान नहीं है।
भारत सरकार का रुख अभी भी सख्त एक तरफ जहां प्रबुद्ध नागरिक पत्र के जरिए शांति की अपील कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार का रुख अब भी बेहद सख्त है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अपना स्टैंड स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक द्विपक्षीय वार्ता संभव नहीं है। दिल्ली ने किसी भी प्रकार की बैक-चैनल बातचीत से भी इनकार किया है।
#WATCH | Delhi: On letter of over 100 prominent citizens from India & Pakistan to both PMs for restoring peace, normalcy, dialogue , one of the signatories - former R&AW chief Amarjit Singh Dulat says, This is an initiative taken by a gentleman who has been working for years on… pic.twitter.com/n9R7CfZAg2
— ANI (@ANI) July 1, 2026
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