श्रावणी मेला 2026 के आयोजन में अब कुछ ही दिन शेष हैं। इसे देखते हुए भागलपुर की जिलाधिकारी (DM) अलंकृता पांडेय ने सुल्तानगंज पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने लापरवाही पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और कार्यों को 10 दिन के भीतर पूर्ण करने का अल्टीमेटम दिया।
4 घंटे चला निरीक्षण: घाट से कंट्रोल रूम तक सब पर नजर डीएम अलंकृता पांडेय ने सुल्तानगंज में चार घंटे का लंबा समय बिताया। उन्होंने नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ मंदिर, सीढ़ी घाट, कृष्णगढ़ स्थित नियंत्रण कक्ष और कच्चे कांवरिया पथ का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि कांवरियों की सुरक्षा और सुविधा में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुरक्षा को लेकर विशेष सख्ती नमामि गंगे घाट पर फिसलन को लेकर डीएम ने विशेष चिंता जताई। उन्होंने सीढ़ियों के आसपास मजबूत सुरक्षा घेरा बनाने और जर्मन हैंगर वाले इलाके में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए। वहीं, बिजली विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि मेला क्षेत्र में कहीं भी लटकते बिजली के तार नहीं दिखने चाहिए। विद्युत सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग की होगी।
पेयजल और स्वच्छता पर प्रशासन का जोर अजगैबीनाथ मंदिर के घाटों को 12 जुलाई तक पूरी तरह तैयार करने का आदेश दिया गया है। पीएचईडी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मंदिर परिसर के पास पुरुषों और महिलाओं के लिए आधुनिक शौचालय और निर्बाध पेयजल की व्यवस्था की जाए। हर साल इन्हीं बुनियादी सुविधाओं की कमी से श्रद्धालुओं को जूझना पड़ता था, जिसे इस बार प्रशासन ने अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है।
शिव थीम और मनोरंजन का रहेगा तड़का इस बार श्रावणी मेले को केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। डीएम ने बताया कि पूरा नगर क्षेत्र भगवान शिव की थीम पर सजाया जाएगा। इसके अलावा कांवरियों के मनोरंजन और आकर्षण के लिए लेजर शो, ड्रोन शो और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
प्रशासन के लिए 10 दिनों की चुनौती निरीक्षण बैठक में एसएसपी प्रमोद कुमार यादव सहित जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय विधायक प्रो. ललित नारायण मंडल ने भी व्यवस्था को लेकर सुझाव दिए। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगले 10 दिनों में जमीन पर सभी दावों को सच्चाई में कैसे बदला जाए, क्योंकि मेला शुरू होते ही लाखों श्रद्धालुओं का दबाव प्रशासन की कार्यक्षमता की असली परीक्षा लेगा।
*पटना: बिहार सरकार की सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली (2026) को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई. उनका कहना है कि इसमें नियुक्ति को स्थायी की जगह संविदा पर रखा गया है और उम्र सीमा 55 से घटाकर 40 कर दी गई है, जिससे कई पुराने अभ्यर्थी प्रभावित होंगे. मेरिट में मैट्रिक और इंटर के… pic.twitter.com/m9iV8C3BGZ
— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) June 29, 2026
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